आजम खान ने Y सिक्योरिटी लेने से किया मना।
मैं मुर्गी-चोर, मुझे सिक्योरिटी कैसे, भरोसा नहीं।

रामपुर : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान ने वाई श्रेणी की सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश नहीं मिलता तब तक वह सुरक्षा स्वीकार नहीं करेंगे. आजम खान ने कहा, मैं मुर्गी चोर-बकरी चोर हूं, मुझे 21 साल की सजा है, तो मुझे कैसे सुरक्षा मिल रही है. वर्दी में कौन है, मुझे भरोसा नहीं है।
सपा नेता ने कहा कि जब एक बार के विधायक को केंद्र सरकार की ओर Z श्रेणी की सुरक्षा मिल सकती है, तो मुझे केवल वाई श्रेणी की सुरक्षा क्यों दी गई है. मुझे भी इतनी सुरक्षा तो दी जाए, जितनी मेरे विरोधियों के पास है. मेरे विरोधियों के पास सेंट्रल गवर्नमेंट के कमांडोज है।
लिखित में चाहिए जवाब : आजम खान ने कहा, मैंने आज उन कांस्टेबल से भी कहा कि जब तक मुझे लिखित जवाब नहीं मिल जाता कि मुझे सुरक्षा मिली हुई है, तक तक मैं इसको लेने को तैयार नहीं हूं. मुझे हालात ने इतना सीखा दिया है. सरकारी जमीनों पर से लोगों के कब्जे सरकार ने हटाए, उस पर निर्माण हुआ वह सरकार ने किया, बने हुए मकान का अलॉटमेंट सरकार ने किया और 21 साल की सजा मुझे हुई।
सुरक्षा पर कैसे करूं भरोसा : उन्होंने कहा, 36 लाख का जुर्माना मुझ पर पड़ा. मैं कैसे ले लूं सुरक्षा. जब तक मेरे पास कोई तहरीर ना हो. किसने दी मुझे यह सुरक्षा मैं कैसे भरोसा करूं ये खाकी वर्दी पहने हथियार लिए हुए लोग उत्तर प्रदेश सरकार के हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मीडिया की खबरों में मैं सजायाफ्ता मुजरिम हूं, जिसे सुरक्षा नहीं मिल सकती, तो मैं अभी कैसे ले लूँ? मेरे पास कोई अधिकारिक जानकारी नहीं होगी तो कैसे उन पर भरोसा करूंगा।
मेरी माली हालत ठीक नहीं : आजम खान ने कहा, मेरी माली हालात इस वक्त ऐसी नहीं है कि मैं सिक्योरिटी के लिए गाड़ी का इंतजाम कर सकूं, मैंने यह भी मैसेज कराया है कि अगर आप सिक्योरिटी दे रहे हैं मेरे पास इन्हें बैठने के लिए गाड़ी नहीं है. वाई श्रेणी में सबकुछ उपलब्ध करवाया जाता है, मुझे ऐसा कुछ नहीं मिला. जो एक बार का एमएलए होता है उनके पास भी दो-दो गनर है।
सब कहेंगे मरहूम आदमी बढ़िया था : आजम खान ने कहा, जो पहली दफा विधायक बने हैं उन्हें जेड प्लस से लेकर सेंट्रल फोर्स के कमांडों तक मिले हैं. अगर सुरक्षा देनी है तो कम से कम इतनी दें जितनी मेरे विरोधियों के पास है. पहले एक सिपाही मिला था, लेकिन अब दौरों पर जाने की हिम्मत नहीं होती, इलाज के लिए दिल्ली जाता हूं और अकेले ही वापस आ जाता हूं. अगर किसी दिन कोई हादसा हो गया, तो कौन जिम्मेदारी लेगा. बस विधानसभा और संसद में शोक व्यक्त हो जाएगा. सब कहेंगे कि मरहूम आदमी बढ़िया था।



