
देहरादून : घंटाघर से सटी राजपुर रोड पर स्थित इंदिरा मार्केट, शहर के सबसे पुराने और व्यस्ततम व्यापारिक केंद्रों में से एक है। यह जगह हमेशा से अपनी संकरी गलियों, भीड़-भाड़ और अव्यवस्थित पार्किंग के लिए चर्चित रही है। 2016 पुनः वर्ष 2022 में इस बदहाल बाजार के पुनर्विकास की आधारशिला वर्तमान मुख्यमंत्री ध्दारा रखी गई थी। योजना के अनुसार पुरानी दुकानों को तोड़कर यहां एक आधुनिक मल्टीलेवल कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है, मगर परियोजना शुरू से लेकर अब तक अब तक विवादों में रही है।
यह पुनर्विकास योजना सालों 2016 में कांग्रेस सरकार के शासनकाल में शुरू हुई, किंतु प्रशासनिक सुस्ती, कार्यदायी संस्था सामक की भारी लापरवाही और सत्ता परिवर्तन के कारण यह लंबे अरसे तक अधर में लटकी रही। दिसंबर 2022 में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 242 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास की शुरुआत का ऐलान किया, लेकिन प्रोजेक्ट की लागत धीरे-धीरे बढ़कर करीब 450 करोड़ रुपये हो गई है, जो पहले से ही बोझिल प्रशासनिक ढांचे पर आर्थिक दबाव का संकेत है।
इस सबके विपरीत एमडीडीए का दावा है कि मार्च 2028 तक परियोजना पूरी हो जाएगी, लेकिन वर्तमान तस्वीर इसके विपरीत मौके काम ठप्प है और सन्नाटा पसरा हुआ है । तीन साल बीत जाने के बाद भी इस परियोजना कुल तीन महीने ही मुश्किल काम हो पाया है। निर्माणाधीन स्थल पर महज 3 से 4 श्रमिक नजर आते रहे हैं, जबकि यहां कम से कम 100 से 200 मजदूरों का होना आवश्यक है। इतना ही नहीं, निर्माण कंपनी ‘सामग कंस्ट्रक्शन’ का प्रोजेक्ट हेड भी काम पूरा होने की समयसीमा से अनभिज्ञ है। इस सुस्ती के चलते पूर्व में राजपुर रोड के स्थानीय विधायक को बैठक करके अधिकारियों की फटकार लगानी पड़ी और नाराज व्यापारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर धरने की चेतावनी दे डाली।
सबसे गंभीर मसला इस परियोजना में उलझे करीब 600 व्यापारियों के भविष्य का है, जो फिलहाल पुनर्विकास के चक्कर में मंझधार में फंसे हुए हैं। अस्थाई मार्केट में शिफ्ट हुए दुकानदारों की आजीविका प्रभावित हो रही है, और जो दुकानें आवंटित की जा रही हैं, वे बेहद छोटी हैं। माकपा व अन्य दलों ने आरोप लगाया है कि पुनर्विकास के नक्शे बदले जा रहे हैं और इससे व्यापारियों का नुकसान हो रहा है। यह एक बड़ी विडंबना है कि जिन व्यापारियों के लिए यह योजना बनाई गई थी, आज वही इस योजना के पूरे होने के प्रति आशांकित हैं
यदि सरकार, प्रशासन, एमडीडीए तथा सामक कम्पनी गम्भीर होती तो इंदिरा मार्केट का पुनर्विकास का कार्य अधर में न लटकता । लेकिन जब तक आज प्रशासन काम की रफ्तार, व्यापारियों के मसले और बढ़ती लागत जैसे कड़वे सवालों के जवाब देने में विफल रहेगा, यह महत्वाकांक्षी योजना सिर्फ एक और ‘मिस्ड डेडलाइन’ और व्यापारियों के लिए बदहाली की वजह बनकर रह जाएगी।
आज फिर से प्रभावितों ने एमडीडीए सचिव, कम्पनी प्रतिनिधियों से वार्ता हुई किन्तु परिणाम शून्य है, अब प्रभावितों के पास आन्दोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं है
आज वार्ता के दौरान प्रभावितों की ओर से अनन्त आकाश,दिनेश सती, अशोक सचदेवा, धर्मेंद्र कुमार, मुमताज़, इमरान, मेहरबान, मनमोहन आदि शामिल थे



