पेट्रोल पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला।

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, अब उच्च स्तर के इथेनॉल मिले पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क को पूरी तरह से हटा दिया गया है. सरकार ने इस टैक्स को ‘शून्य’ कर दिया है।
यह छूट उन सभी पेट्रोल वेरिएंट्स पर लागू होगी जिसमें इथेनॉल की मात्रा 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक होगी. इसके तहत अब बाजार में आने वाले E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के पेट्रोल को टैक्स छूट का सीधा फायदा मिलेगा. सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 5A क तहत यह विशेष छूट दी है. हालांकि, इस छूट को पाने के लिए ईंधन को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े नियमों और गुणवत्ता पैमानों पर खरा उतरना होग।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बदलते रहते हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है. सरकार का मुख्य उद्देश्य इस आयात को कम करना और देश के भीतर ही बनने वाले स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन को बढ़ावा देना है।
इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, मक्के और अन्य अनाजों से होता है. ऐसे में इस नीति से न केवल देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा, बल्कि भारत के करोड़ों किसानों की आमदनी में भी भारी इजाफा होगा।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में भारत की इस बड़ी कामयाबी का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि साल 2014 में देश के पेट्रोल में सिर्फ 1.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता था. सरकार के लगातार प्रयासों के कारण नवंबर 2022 तक यह बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया।
सरकार ने पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य साल 2030 तक रखा था. लेकिन देश की तेल कंपनियों और निर्माताओं के बेहतरीन तालमेल की वजह से इस बड़े लक्ष्य को तय समय से बहुत पहले, यानी साल 2024 में ही पूरा कर लिया गया. इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए बेहद शक्तिशाली E85 ईंधन भी लॉन्च किया है. टैक्स में दी गई यह नई छूट भारत को पर्यावरण के अनुकूल और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।



