उत्तराखंडदेहरादून

SIR प्रक्रिया से जनता व बीएलओ परेशान, शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव मानवाधिकार आयोग ने की सुधार की मांग।

एसआईआर प्रक्रिया से जनता व बीएलओ परेशान,
शिक्षकों पर अतिरिक्त दवाब
मानवाधिकार आयोग ने चुनाव आयोग से सुधार की मांग की
संवाददाता
देहरादून। विश्व मानवाधिकार सुरक्षा आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा0 सुनील अग्रवाल ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर एसआईआर (स्पेशल इंटेनसिव रिवीजन) में दिख रही विसंगतियों और उससे उत्पन्न समस्याओं को जल्द दूर करने की अपील की है। डा0 अग्रवाल का कहना है कि जिन मतदाताओं ने पिछले 20-30 वर्षों से नियमित रूप से वोट दिया है, उन्हें भी एसआईआर के तहत नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे वे परेशान हैं।
डा0 अग्रवाल ने बताया कि इस कदम का मूल उद्देश्य फर्जी मतदाताओं को हटाना था, जो स्वागत योग्य था, परंतु जटिल प्रक्रिया और अमल में आई दिक्कतों के कारण वैध मतदाता भी प्रभावित हो रहे हैं। कई मामलों में पूर्ववर्ती वोटर सूची में नाम के अक्षरों की त्रुटि या पते का आंशिक रूप से गलत अंकन मतदानकर्ता की ही गलती नहीं है, क्योंकि वे वर्षों से उसी नाम और पते के आधार पर मताधिकार का प्रयोग करते आ रहे हैं। इनमें पहले के वर्षों में वोटर कार्ड बनाते समय कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हुई गलतियाँ भी शामिल हैं।
डा0अग्रवाल ने कहा कि इन भूल-चूक की सुधर-सम्भव के लिए अभियान चलाना सही कदम था, किन्तु बीएलओ (ब्लॉक/बेसिक लेवल ऑफिसर) के निरीक्षण के बाद सीधे नोटिस भेज दिए जाने से लोगों को अनावश्यक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही एसआईआर प्रक्रिया न केवल आम नागरिकों को परेशान कर रही है बल्कि जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है, वे भी दबाव में हैं।
सूत्रों के अनुसार अधिकांश बीएलओ शिक्षा विभाग से जुड़े हैं और उन्हें इस प्रक्रिया में तैनात करने से वे लगातार मतदाताओं के सवालों और नाराज़गी का सामना कर रहे हैं। कई बार नोटिस प्राप्त करने वाले सीधे चुनाव आयोग तक पहुंचने की बजाय बीएलओ से ही संपर्क करते हैं, जिससे बीएलओ पर काम का भार और तनाव बढ़ गया है। डा0 अग्रवाल ने कहा कि शिक्षकों को इस तरह की अतिरिक्त ड्यूटी दिए जाने से न केवल उनकी भूमिका पर असर पड़ता है बल्कि इससे छात्रों की पढ़ाई और शिक्षण प्रक्रिया पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
डा0 सुनील अग्रवाल ने सुझाव दिया है कि ऐसे कारवाई कार्यों के लिए शिक्षण पेशेवरों को लगाने के बजाय स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित कर उनकी जिम्मेदारी सौंपी जाए। इससे न केवल शिक्षकों और छात्रों पर पड़े अनावश्यक दबाव में कमी आएगी बल्कि युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
स्थानीय चुनाव कार्यालय या निर्वाचन कार्यालय की ओर से अभी तक इस संबंध में आधिकारिक टिप्पणी आनी बाकी है। चुनाव आयोग और संबंधित विभाग से उम्मीद है कि आयोग द्वारा उठाई गई समस्याओं और सुझावों की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि वैध मतदाताओं की परेशानियों का निराकरण हो और एसआईआर प्रक्रिया सुचारु व न्यायसंगत तरीके से आगे बढ़ाई जा सके।

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