देश-विदेशनई दिल्ली

मिर्जापुर के लाल ने अमेरिका में लहराया परचम।

मिर्जापुर : अमेरिका के बर्मिंघम शहर में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स 2025 में भारत को बड़ी सफलता मिली है. मिर्जापुर के खिरौड़ी गांव के रहने वाले शेखर पांडेय ने पोल वाल्ट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है. पांच जुलाई को हुए पोल वाल्ट फाइनल मुकाबले में उन्होंने पांच मीटर की शानदार छलांग लगाकर रशियन खिलाड़ी को हराया. शेखर CISF में सब इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में बेंगलुरु एयरपोर्ट पर तैनात है।

गांव में खुशी का माहौल : अमेरिका के अलबामा प्रांत के बर्मिंघम में 30 जून से 6 जुलाई के बीच विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेल प्रतियोगिता आयोजित की गई थी. इसी प्रतियोगिता में शेखर रजत पदक भी जीत चुके हैं. शेखर के पिता नंदलाल पांडेय कृषक हैं और माता सीता देवी गृहिणी हैं. उनकी शानदार उपलब्धि पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है, शेखर का रूझान बचपन से ही खेल में रहा. देश के लिए 18 मेडल और प्रदेश में 30 मेडल जीतकर कामयाबी के शिखर पर पहुंचे शेखर पांडेय नौकरी के बाद भी खेल से जुड़े हैं. शेखर ने अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय खेमईबरी से की है. हाई स्कूल और इंटर देवकली इंटर कॉलेज जमालपुर से पूरा किया है।

बांस के डंडे और रेत पर करते थे प्रैक्टिस : साधारण किसान परिवार में जन्मे शेखर पांडेय ने सुविधाओं के अभाव में बांस की छड़ियों को डंडे के रूप में इस्तेमाल करते हुए गंगा के तट पर रेती पर अपना अभ्यास कार्य शुरू किया. सबको आश्चर्य तब हुआ जब शेखर ने बिना किसी मार्गदर्शन के मात्र एक सप्ताह के अभ्यास के बाद जिला स्तरीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत लिया, शेखर बताते हैं, जब मैंने पहली बार पोल वॉल्टिंग देखी, तो मुझे यह बहुत आसान लगा, क्योंकि मैं बांस की छड़ियों का उपयोग करके छोटी नदियों पर कूदा करता था. मैंने बिना किसी उचित प्रशिक्षण के जिला स्तर पर पदक जीता, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा उसी का नतीजा है कि आज हम यहां पहुंचे है।

नेशनल कोच ने बदली जिंदगी : शेखर ने बताया कि वाराणसी में मुझे खेल के तकनीकी पहलुओं के बारे में पता चला और मैंने अभ्यास शुरू किया. मेरे सीनियर रक्षित कुमार ने मुझे अभ्यास के लिए अपना फाइबर पोल दिया. यह पहली बार था जब मैंने फाइबर पोल देखा था, स्टेडियम में उनके कोच राजेंद्र सिंह ने उन्हें केवल 15 दिनों के लिए प्रशिक्षित किया. उस दौरान राष्ट्रीय कोच प्रभाष चंद्र त्यागी से उनका परिचय कराकर उनकी जिंदगी बदल दी, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद की।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button