
देहरादून : बस्ती बचाओ आन्दोलन के तहत विभिन्न संगठनों एवं प्रभावितों द्वारा कल बस्ती बचाओ उत्तराखण्ड देहरादून के वैनर तले कल 10 अप्रैल 025 सांय 6:30 बजे पटेलनगर लालपुल से जनजागृति हेतु कैण्डिंल मार्च निकाला जायेगा ।
मार्च न्यू पटेलनगर,
सत्तोवाली घाटी ,संगमविहार आदि क्षेत्रों में जायेगा तथा प्रभावितों को बिस्थापन ,पुनर्वास तथा मुआवजा के सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के सन्दर्भ में अवगत करायेगा तथा प्रभावितों को उनके अधिकारों के प्रति संगठित करेगा ।
बस्ती बचाओ अभियान के द्वारा जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि डबल इन्जन सरकार द्वारा अपने वायदे के विपरीत देहरादून की बिन्दाल ,रिस्पना तथा अनेक स्थानों में बस्तियों के बिस्थापन का ऐलान किया है ,जिसके तहत बिन्दाल,रिस्पना के ऊपर 4 लाईन एलिवेटेड रोड़ स्वीकृत है ,तथा बड़ी संख्या में बस्तियों के बिस्थापन की कार्यवाही सुनिश्चित है,दूसरी तरफ एनजीटी के निर्णय के परिणामस्वरूप बस्तियों की वैधता पर प्रश्नचिन्ह लगाये गये हैं ,जिसके तहत भी उन्हें हटाने की प्रक्रिया है, तीसरी तरफ बस्तियों आदि के सन्दर्भ में हाईकोर्ट उत्तराखण्ड में सुनवाई चल रही है ,गौरतलब है कि हमारी सरकार ,प्रशासन तथा याचिकाकर्ताओं को केवल गरीब लोग दिखते हैं जब चाहें तब बल प्रयोग कर उन्हें बेदखल किया जाय तथा अमीरों के अकूत कब्जों पर सभी तरफ से आंखें बन्द हैं,वोट के समय मुख्यमंत्री जी से लेकर विधायकगण तथा पार्षदगण आपके पास आकर बड़े -बड़े वायदे कर ऐनकेन प्रकारेण सत्ता हासिल कर बाद को पूंजीपतियों के पक्ष में खड़े हो जाते है । बिडम्बना है कि हम उनके झांसे में आकर अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ कर बैठते हैं ।
आन्दोलन ने याद दिलाया कि स्थानीय निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री जी ने बस्तियों की सुरक्षा की बात की थी किन्तु चुनाव जीतने के कुछ दिन बाद ही गैर जरूरी एलिबेटेड रोड़ बनाने की घोषणा की जो कि देहरादूनवासियों के हितों के अनुरूप नहीं है ।आपको मालूम हो कि जहाँ प्रभावशाली लोगों की सत्ता तक पहुंच है ,वहाँ मुआवजे एवं समुचित बिस्थापन की घोषणा पहले ही की जाती है ,आढ़त बाजार का उदाहरण आपके सामने है ।
आन्दोलन ने कहा एलिवेटेड रोड़ के प्रभावितों के सन्दर्भ में हमारी सरकार एवं जनप्रतिनिधि चुपचाप हैं, यही हर बार गरीबों के साथ होता है तथा सत्ता के बल पर जोर जबरदस्ती बेदखली की जाती है ।
आन्दोलन ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी योजना को लागू करने से पहले प्रभावितों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना आवश्यक है । सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि सरकारी योजनाऐं, नीतियां प्रभावित व्यक्तियों और समुदायों के अधिकारों और हितों का सम्मान करें।सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिये ,जब कोई योजना या परियोजना लोगों को विस्थापित कर सकती है, तो सरकार को पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीतियों को लागू करना चाहिए ताकि प्रभावित व्यक्तियों के जीवनस्तर में सुधार सुनिश्चित हो सके ,सरकार द्वारा प्रभावित समुदायों को योजनाओं और परियोजनाओं के बारे में पर्याप्त जानकारी और परामर्श प्रदान किया जाना चाहिए, जिससे वे अपने विचार और चिन्ताऐं व्यक्त कर सकें।सर्वोच्च न्यायालय ने प्रभावित समुदायों की सहमति और सहभागिता की आवश्यकता पर जोर दिया है, खासकर जब परियोजनाऐं उनकी जमीन, जीवन शैली या पर्यावरण को प्रभावित कर रही हों ,सर्वोच्च न्यायालय के इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास और प्रगति की आड़ में नागरिकों के अधिकारों का हनन न हो और उनकी आजीविका और जीवन शैली की रक्षा हो सके ।सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी योजना को लागू करने से पहले प्रभावितों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना आवश्यक है ,लेकिन सामान्य तौर पर, सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि सरकारी योजनाऐं और नीतियां प्रभावित व्यक्तियों और समुदायों के अधिकारों और हितों का सम्मान करें। जब कोई योजना या परियोजना लोगों को विस्थापित करती हो तो सरकार को पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीतियों को लागू करना चाहिए जो प्रभावित व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित करें।
आन्दोलन ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार सरकार, माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड तथा एनजीटी नई दिल्ली को प्रभावित नागरिकों के साथ व्यवहार कि अपेक्षा के साथ हम मांग करते हैं कि :-
(1) एलिवेटेड रोड़ से उत्पन्न समस्याओं का माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप अक्षरश: पालन किया जाये ।
(2)सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप प्रत्येक प्रभावित को समुचित मुआवजा तथा पुर्नवास सुनिश्चित किया जाये ।
(3)एनजीटी के बेदखली के फैसले पर रोक लगाई जाये ।
(4)बस्तियों आदि के खिलाफ हाईकोर्ट उत्तराखण्ड में दायर याचिका पर सरकार जोरदार पैरवी कर बस्तियों की बेदखली रोके ।
(5)सरकार अपने वायदे के अनुरूप बस्तीवासियों को मालिकाना हक प्रदान करे ।
इन्ही मुद्दों को लेकर बस्ती बचाओ आन्दोलन के वैनर के तहत आगामी 15 अप्रैल 025 जिलामुख्यालय पर प्रदर्शन होगा जहाँ जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्रीजी को हजारों हस्ताक्षरों का ज्ञापन दिया जायेगा ।



