
देहरादून : चित्रा इंटरनेशनल आर्ट गैलरी, देहरादून में दिनांक 20 जून से आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कला प्रदर्शनी एवं कला शिविर “कला मंथन (चतुर्थ संस्करण)” का गरिमामय समापन समारोह 24 जून 2026 को सम्पन्न हुआ। कला, संस्कृति एवं सृजनशीलता को समर्पित इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों, कला प्रेमियों एवं गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री सौरभ थपलियाल, महापौर, नगर निगम देहरादून थे। उन्होंने प्रदर्शनी में प्रदर्शित सभी कलाकारों की कलाकृतियों की सराहना की तथा देहरादून में कला कार्यशाला एवं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के सफल आयोजन हेतु संयोजक ताराचंद शर्मा एवं समस्त आयोजन दल को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्नल भारत भंडारी तथा प्रो. भारत भूषण उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कलाचर्चा ट्रस्ट द्वारा प्रतिष्ठित “संतोष स्मृति कलाचर्चा सृजन सम्मान (SSKSS)” महापौर श्री सौरभ थपलियाल द्वारा प्रदान किए गए। वर्ष 2024 के लिए यह सम्मान डॉ. चंद्रशेखर काले तथा वर्ष 2025 के लिए श्री सुरेन्द्र सिंह को प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप प्रत्येक सम्मानित कलाकार को ₹21,000 (इक्कीस हजार रुपये) की नकद राशि, प्रशस्ति-पत्र एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कलाचर्चा ट्रस्ट की महासचिव एवं वरिष्ठ कलाकार भावना सक्सेना ने बताया कि यह सम्मान दृश्यकलाओं के संवर्धन एवं कलाकारों के प्रोत्साहन हेतु कुशल प्रशासक, संवेदनशील साहित्यकार, फोटोग्राफर एवं कलाकार डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी द्वारा अपनी बहन संतोष की स्मृति में प्रारम्भ की गई एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल है। यह सम्मान प्रतिवर्ष ऐसे सृजनशील कलाकार को प्रदान किया जाता है, जो अपनी कला-साधना के प्रति निरंतर समर्पित रहते हुए समाज में सकारात्मक योगदान देता है तथा अपने सृजन के माध्यम से विशिष्ट एवं स्थायी प्रभाव स्थापित करता है।
उल्लेखनीय है कि इस सम्मान को कलाचर्चा ट्रस्ट के महत्वाकांक्षी आयोजन “कला मंथन” से संबद्ध किया गया है, जिसके अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों में कला कार्यशालाओं, कला शिविरों एवं राष्ट्रीय स्तर की कला प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है। यह पहल राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक संवाद तथा कलात्मक सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संतोष स्मृति कलाचर्चा सृजन सम्मान कला-साधना, सृजनशीलता, सांस्कृतिक चेतना एवं कलात्मक उत्कृष्टता को सम्मानित करने का एक सतत प्रयास है। यह सम्मान उन कलाकारों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समृद्ध बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।


