
देहरादून : न केवल रूस, बल्कि पूरी दुनिया के अमन पसंद और वामपंथी विचारधारा तथा दुनियाभर की मुक्तिकामि जनता के लिए भी 9 मई, 1945 सबसे शानदार एवं ऐतिहासिक दिनों में से एक है। जिसने द्वितीय विश्वयुद्ध के भयावह दौर को समाप्त किया । रूस के लोगों के लिए यह 1941 और 1945 के बीच फांसीवादी जर्मनी की खूंखार सैन्य ताकत के खिलाफ महान देशभत्ति पूर्ण युद्ध के रूप मेंं जाना जाता रहा है । यह दिन ताकतवर फांसीवादी सैन्य शक्ति को परास्त करने में सोवियत संघ की लाल सेना एवं सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी तथा महान नेता कामरेड स्तालिन की अगुवाई वाली वहाँ की जनता की निर्णायक भूमिका को पहचानने और याद रखने के लिए दुनिया में याद किया जाता रहेगा ।इससे पूर्व जर्मनी, इटली और स्पेन एक खतरे के रूप में उभरे और उन्होंने एक के बाद एक कई देशों पर कब्जा कर लिया, लाखों लोगों को मौत के घाट उतार तथा अनेक महानगरों, शहरों और गांवों को तबाह कर दिया और पूरी मानव जाति जिन्दगी जीने पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया । महान मानवतावादी रोमां रोलां, बर्नार्ड शाॅ, आइंस्टीन, रवीन्द्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस सहित तमाम अमन पसंद लोग सोवियत संघ और स्तालिन को मुक्तिदाता मानते रहे हैं । महान सोवियत संघ ने उस ऐतिहासिक मिशन को पूरा किया। इस युद्ध में लगभग 5 करोड़ निर्दोष लोग मारे गये जिसमें बड़ी संख्या सोवियत के नागरिकों हैं। ढाई करोड़ से भी से ज्यादा सोबियत लोग बेघर हो गये। लगभग
2 हजार शहर, 70 हजार गांव और 32 हजार उद्योग तबाह हो गये। इस युद्ध में लाखों बच्चों ने अपने मां-बाप खो दिये। अनेक माताओं ने अपने बच्चे खो दिये। हजारों महिलाऐं बलात्कार की शिकार हुईं। हजारों महिलाओं की हत्या कर दी गयी। सर्वहारा के महान नेता काॅमरेड स्तालिन की उपस्थिति और नेतृत्व के कारण ही इतनी बड़ी तबाही और भारी नुकसान का सामना करने के बाद भी सोवियत संघ ने फांसीवादी जर्मनी को इस युद्ध में फैसलाकुन शिकस्त देकर विश्व को फासीवाद के शिंकजे से मुक्त किया ।
विजय मार्च के दौरान लाल सेना ने अधिकांश यूरोप और कोरिया को मुक्त कर दिया। यह 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय घटना है। क्रूर फांसीवादी ताकत के खिलाफ इस खूनी युद्ध में सोवियत जनता की कुर्बानी मानव जाति के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। जो हिटलर दुनिया को अपने बुटों तले रोंदना चाहता है ,उसे सोवियत लालसेना ने आत्महत्या के लिए विवश किया । यह दिन 1945 में नाजी जर्मनी के आत्मसमर्पण की याद दिलाता है। 8 मई, 1945 की देर शाम को जर्मनी द्वारा समर्पण-पत्र पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद सोवियत सरकार ने 9 मई, 1945 को ‘विजय दिवस’ की घोषणा
की।
द्वितीय विश्व युद्घ की विजय के बाद दुनियाभर में औपनिवेशिक देशों के आजादी आंदोलनों और महानगरीय देशों में समाजवादी आंदोलन ने अपार गति प्राप्त की। सोवियत संघ द्वारा मदद पाकर कई औपनिवेशिक देशों ने राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल की।हमारे देश के मुक्ति संघर्ष तथा आजादी में सोवियत की बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है ,यहाँ तक आजादी के बाद हमारे देश के चहुमुखी विकास में सोवियत जनता की ऐतिहासिक योगदान के लिऐ।
हम सदैव वहाँ की जनता के आभारी हैं । 9 मई एक यादगार ऐतिहासिक दिन है। इस साल 9 मई को ‘फांसीवादी जर्मनी की पराजय’ की 79 वीं वर्षगांठ पर हम फांसीवादी ताकतों को शिकस्त करने में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वालों आदरपूर्वक याद करते हुऐ उनके योगदान आने वाली कई सदियों तक याद रखेंगे ।

