
देहरादून : बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष दिग्विजय सिंह माथुर ने उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य की सीमाओं पर लगाए गए ‘ग्रीन टैक्स’ को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उन्होंने कहा कि यह टैक्स अब आम जनता के लिए आर्थिक बोझ बनता जा रहा है।
दिग्विजय सिंह माथुर ने कहा कि मूल रूप से यह टैक्स प्रदेश में आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए लागू किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी मार स्थानीय परिवारों और व्यापारियों पर पड़ रही है, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अपने घर आने जाने वाले बच्चों को भी ‘पर्यटक’ माना जाएगा?
रुड़की और हरिद्वार क्षेत्र के अनेक परिवारों के बच्चे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और दिल्ली जैसे शहरों में शिक्षा और रोजगार के लिए रहते है, सप्ताहांत पर जब वे अपने माता-पिता से मिलने आते है, तो उन्हें ग्रीन टैक्स देना पड़ता है, जो अनुचित है
उन्होंने आगे कहा कि देवबंद, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से प्रतिदिन बड़ी संख्या में व्यापारी और नागरिक अपने कार्यों के लिए रुड़की और देहरादून आते है, बार-बार लगने वाला यह टैक्स स्थानीय व्यापार, आपसी लेन-देन और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण रुड़की और देहरादून की सामाजिक और आर्थिक संरचना पड़ोसी राज्यों से गहराई से जुड़ी हुई है।
दिग्विजय सिंह माथुर ने सुझाव दिया कि यदि सरकार को यह टैक्स लागू रखना ही है तो इसकी सीमा हरिद्वार के बाद निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि स्थानीय और पारिवारिक आवाजाही प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा, “राजनीति मेरे लिए केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि जनता की सेवा का संकल्प है, रुड़की और देहरादून की भौगोलिक स्थिति और यहां के निवासियों की पारिवारिक एवं व्यापारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्रीन टैक्स की नीति में तत्काल सुधार किया जाना चाहिए।
अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि स्थानीय और पारिवारिक आवागमन को ग्रीन टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।



