
थानों : मुस्लिम सेवा संगठन, थानों, जामा मस्जिद थानों को सील किए जाने की कार्रवाई का कड़ा विरोध करता है और इसे अन्यायपूर्ण एवं अवैध मानता है। संगठन का कहना है कि थानों जामा मस्जिद वर्ष 1979 से अस्तित्व में है तथा वर्ष 1988 से सरकारी अभिलेखों में मस्जिद के रूप में दर्ज है। इसलिए इसे किसी नए अथवा हालिया निर्माण के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों के विपरीत है।
संगठन के अनुसार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा मस्जिद परिसर में एक कमरा निर्माण हेतु ₹ आठ लाख तीन हजार की धनराशि स्वीकृत की गई थी तथा निर्माण कार्य का दायित्व पेयजल विभाग को सौंपा गया था। तत्कालीन प्रमुख सचिव द्वारा धनराशि आवंटित करते समय यह शर्त रखी गई थी कि संबंधित संस्था द्वारा आवश्यक नक्शा स्वीकृत कराया जाएगा। चूंकि निर्माण कार्य की कार्यदायी संस्था पेयजल विभाग था, इसलिए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने का दायित्व भी उसी विभाग का था।
मुस्लिम सेवा संगठन का आरोप है कि पेयजल विभाग द्वारा आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना निर्माण कार्य कराया गया। यदि किसी प्रकार की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था एवं संबंधित अधिकारियों की है, न कि मस्जिद प्रबंधन की। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
संगठन का यह भी कहना है कि उत्तराखंड अर्बन प्लानिंग एवं डेवलपमेंट संबंधी प्रावधानों में वर्ष 2017 के संशोधन के तहत किसी संस्था के विरुद्ध कार्रवाई से पूर्व उसे नोटिस देना आवश्यक है। किंतु थानों मस्जिद प्रकरण में मस्जिद प्रबंधन को कोई नोटिस प्रदान नहीं किया गया। पहले कमरे को सील किया गया और बाद में पूरी मस्जिद को सील कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
मुस्लिम सेवा संगठन का यह भी मत है कि मस्जिद का अस्तित्व एमडीडीए के गठन से पहले का है तथा धार्मिक स्थलों के संदर्भ में एमडीडीए की भूमिका एवं अधिकार क्षेत्र को लेकर भी गंभीर कानूनी प्रश्न मौजूद हैं। संगठन का कहना है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, जबकि वर्तमान कार्रवाई से समुदाय के धार्मिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
मुस्लिम सेवा संगठन थानों जामा मस्जिद की सीलिंग की कार्रवाई का पुरजोर विरोध करता है तथा इस अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से संघर्ष जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में सड़क से लेकर न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ेगा और न्याय मिलने तक अपने प्रयास जारी रखेगा।
संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि मस्जिद पर की गई सीलिंग की कार्रवाई को तत्काल वापस लिया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के शासन के अनुरूप न्याय सुनिश्चित किया जाए।



