उत्तर प्रदेशराजनीति

यूपी की 403 सीटों पर किसे टिकट देगी बसपा?

 लखनऊ की बैठक में मायावती ने कर दिया क्लियर।

लखनऊ : बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि जनता सरकार की उदासीनता से परेशान है और बीएसपी से उम्मीद लगाए हुए है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को पूरी निष्ठा और मेहनत से काम करने का निर्देश दिया।

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी क्रम में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने आज मंगलवार (31 मार्च) को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में यूपी स्टेट और जिला पदाधिकारियों की बैठक की. इस बैठक में संगठन की जमीनी और आर्थिक मजबूती तथा चुनावी तैयारियों की समीक्षा की गई. इस दौरान पूर्व सीएम मायावती ने आगामी विधानसभा चुनाव में आपराधिक तत्वों को टिकट न देने की बात दोहराई।

वहीं बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि जनता सरकार की उदासीनता से परेशान है और बीएसपी से उम्मीद लगाए हुए है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को पूरी निष्ठा और मेहनत से काम करने का निर्देश दिया, बसपा चीफ ने रोटी-रोजी, महंगाई और बेरोजगारी को प्रदेश की बड़ी समस्या बताया।

उन्होंने ‘आत्मनिर्भरता’ को केवल नारा नहीं, बल्कि जमीन पर लागू करने की जरूरत बताई, मायावती ने कहा कि विकास सर्वजन हिताय होना चाहिए, केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं. इसके साथ ही 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती बड़े स्तर पर मनाने की घोषणा की और आरक्षण और कमजोर वर्गों के अधिकारों पर केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना भी की।

मायावती ने कहा कि देश सर्वजन-हितैषी गरीब-समर्थक व रोजगार-युक्त विकास नहीं प्राप्त कर पा रहा है. केवल कुछ मुट्ठी भर सत्ताधारी लोगों के विकास से देश, प्रदेश व व्यापक जनहित कैसे संभव? इस पर विशेष ध्यान देकर बहुजन हितैषी विकास की देश व उत्तर प्रदेश को सख्त जरूरत है।

मायावती ने कहा कि यूपी में रोटी-रोजी के पहले से जटिल समस्या अब और भी विकट रूप धारण कर रही है, जबकि सरकारें ज्यादातर मामलों में अभी भी अपनी जुमलेबाजी व वादों आदि से लोगों की भूख-प्यास को मिटाना चाहती हैं, यह अति-दुखद है।

आत्मनिभर्रता केवल स्लोगन नहीं बल्कि इसको पूरी तत्परता व ईमानदारी के साथ वास्तविकता में बदलने की जरूत है तभी देश में हर हाथ को काम मिलकर बहुजनों का जीवन यहाँ बेहतर होगा. इसके साथ ही प्राइवेट सेक्टर पर अत्यधिक आश्रित होकर क्या देश स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर बन सकता है, इस पर भी गंभीर चिंतन जरूरी है।

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