उत्तराखंडदेहरादून

एनएपीएसआर के पत्र का संज्ञान लिया होता तो स्कूल मे ना चलता देह व्यापार। 

देहरादून : देहरादून स्थित किशन नगर चौक स्थित निजी स्कूल मे चल रहे देह व्यपार पर नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (NAPSR) ने साशन-प्रशासन को घेरते हुए आरोप लगाया है कि एनएपीएसआर ने 07 दिसम्बर 2024 को मुख्य सचिव को पत्रांक संख्या csuk/plgsc-napsr/24 और दिनांक 09 दिसम्बर 2024 को शिक्षा महानिदेशक को पत्रांक संख्या cmpln/de/ps-24 के माध्यम से देहरादून मे गली मोहल्ले मे नियमविरुद्ध चलने वाले स्कूलों की जांच और उन पर अंकुश लगाने की मांग करी थी किन्तु साशन-प्रसाशन की अनदेखी का नतीजा है कि एक एक प्ले ग्रुप स्कूल की आड़ मे देह व्यपार का धंधा चल रहा था । एनएपीएसआर के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने मुख्य सचिव और शिक्षा महानिदेशक को भेजे गए पत्र मे से अवगत करवाया था कि उत्तराखंड एक शिक्षा हब के रूप मे जाना जाता है और आजकल काफी समय से देखने मे आया है कि प्ले ग्रुप और प्रि-प्राइमरी के नाम पर गली मोहल्लों मे सिंगल और डबल स्टोरी मकानों मे मानकों एवं नियमों के विरुद्ध स्कूल खोले जा रहे हैं जिनमे न प्ले ग्राउंड होता है और न ही बच्चों के लिए धूप और उचित सांस लेने की व्यवस्था होती है । और ऊपर वाला न करे यदि किसी स्कूल मे आगजनी या भूकम्प जैसी कोई दैवीय आपदा आती है तो इतने छोटे बच्चे न तो तेजी से भागकर अपनी जान बचा सकते हैं और न ही ऊपर से कूदकर । जैसा को गुजरात के कोचिंग सेंटर मे हुआ था । जबकि नियम ये कहता है कि छोटे बच्चों को प्रथम तल पर रख जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना बच्चों के साथ न घटे किन्तु लोभ से लाभ के लालच मे ऐसे स्कूल धड़ल्ले से खुल रहे हैं और चल रहे हैं जिनमे पैसे के लालच मे डेढ़ साल तक के मासूम बच्चों को भर्ती कर लिया जाता है । जबकि नई शिक्षा नीति के अनुसार 04 वर्ष के बच्चे ही नर्सरी मे एडमिशन ले सकते हैं और उत्तराखंड सरकार द्वारा प्ले स्कूल मे तीन साल के बच्चे ही एडमिशन ले सकते हैं । ऐसे मे गली मोहल्लों मे खुलने वाले ये स्कूल न सिर्फ बच्चों से उनका बचपन चीन रहे हैं बल्कि उनके जीवन से भी खिलवाड़ कर रहे हैं ।

अतः महोदय से प्रार्थना है कि नियम व मानकों के विरुद्ध चलने एवं खुलने वाले ऐसे स्कूलों पर तुरंत अंकुश लगाया जाना चाहिए और इनके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया अमल मे लायी जानी चाहिए ताकि भविष्य मे किसी भी प्रकार की होने वाली अप्रिय घटना से बचा जा सके और बच्चों के बचपन व जीवन से खिलवाड़ बन्द हो सके ।

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