
नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लूट व हत्या के मामले में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने हत्या के दोषी को रिहा करने का आदेश दिया है, क्योंकि घटना के समय दोषी नाबालिग था. हाईकोर्ट ने रुड़की हरिद्वार में साल 2003 में घटित लूट व हत्या के मामले में तीन अभियुक्तों को आजीवन सजा दिए जाने के मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने एक अभियुक्त की सजा को अपराध घटित होने के समय नाबालिग होने के आधार उसकी आजीवन सजा को रद्द कर दिया है. तीनों अभियुक्तों को हरिद्वार रुड़की के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की कोर्ट ने हत्या के मामले में आजीवन की सजा सुनवाई थी।
स्कूल के सर्टिफिकेट की जांच की गई: अभियुक्त ने जेल से ही अपील दायर कर कहा था कि घटना के समय वह नाबालिग था. यह जानकारी 15 जून 2021 को उच्च न्यायालय को जेल प्रशासन के द्वारा दी गयी. 19 अगस्त 2025 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उसकी आयु का पता लगाने का निर्देश रजिस्ट्रार न्यायिक को दिया. अभियुक्त की आयु का पता लगाने के लिए गवाहों व उसके स्कूल के सर्टिफिकेट की जांच की गई।
जांच में नाबालिग पाया गया दोषी: जांच में उसकी जन्म तिथि 22 मई 1988 बताई गयी. घटना के समय दोषी की उम्र 15 साल एक महीने थी. सुनवाई के दौरान उसके अधिवक्ता द्वारा कोर्ट में यह तर्क दिया कि जुवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन एक्ट की धारा 7 ए के अनुसार नाबालिग होने का मामला किसी भी अदालत में किसी भी स्तर, किसी भी समय यहां तक केस के निपटारा होने के बाद भी उठाया जा सकता है।
कोर्ट ने दिए जल्द रिहा करने के आदेश: यह भी कहा कि घटना के समय अभियुक्त नाबालिग था. उसके नाबालिग होने की बात पर निचली अदालत ने सुनवाई नहीं की. वह 13 वर्षों से जेल में बंद है. इसलिए उसे शीघ्र रिहा किया जाए. ऐसे ही कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी को छोड़ने के आदेश दिए हैं. इसलिए उसको भी इसका लाभ दिया जाए. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसे शीघ्र रिहा करने के आदेश जेल प्रशासन को दिए हैं. यह निर्णय न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी व न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने दिया।

