
नैनीताल : उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान बहुचर्चित मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा गोलीकांड मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि जो 6 मामले दर्ज हुए थे, वो किस कोर्ट में और कहां चल रहे हैं? उनकी स्थिति क्या है?
मामले में आज यानी 10 मार्च को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में कहा गया कि अनंत कुमार सिंह का केस कहां चल रहा है, उसकी क्या स्थिति है? इस संबंध में कोई रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है. जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जब से मुकदमे दर्ज हुए हैं, उन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
इस गोलीकांड को 30 साल बीत चुके हैं, लेकिन उनकी क्या स्थिति है, इसका कुछ पता नहीं है. मामले में देहरादून जिला जज ने नैनीताल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के एक पत्र पर इन मुकदमों को मुजफ्फरनगर कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा था, तब से लेकर इनमें कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता रमन शाह ने बताया कि रामपुर तिराहा कांड के दौरान 7 महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ था. जबकि, 17 अन्य लोगों को प्रताड़ित किया गया था. मामले में मुख्य आरोपी मुजफ्फरनगर के तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह समेत 7 अन्य आरोपियों के मामले सीबीआई की ओर से मुजफ्फरनगर कोर्ट को स्थानांतरित कर दिए गए थे, लेकिन इनकी सुनवाई अभी तक लंबित है. राज्य आंदोलनकारियों की सुप्रीम कोर्ट में अपील पर मामला नैनीताल हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था।
क्या था मामला? गौर हो कि साल 1994 में 2 अक्टूबर के दिन उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) पृथक राज्य की मांग को लेकर प्रदर्शन के लिए दिल्ली को जा रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस ने बर्बरता की थी. जहां महिला आंदोलनकारियों के साथ जोर जबरदस्ती और दुष्कर्म किया गया. जबकि, फायरिंग में कुछ आंदोलनकारियों की मौत हो गई।
इस घटना ने पूरे उत्तरांचल को झकझोर कर रख दिया था. वहीं, कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. जबकि, तत्कालीन डीएम अनंत कुमार पर राज्यपाल की ओर से मुकदमे की अनुमति न मिलने से उन्हें छूट मिल गई।
सीबीआई ने मुकदमों के मामलों में हत्याएं, घातक हथियारों और फायरिंग से गंभीर चोट पहुंचाने आदि धाराओं में मामले दर्ज किए. इस मामले में सुनवाई विभिन्न कारणों से लंबित ही रही. आज नैनीताल हाईकोर्ट ने याचिककर्ता, राज्य सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।



