
देहरादून : आज एक खुला खत द्वारा राज्य कांग्रेस, CPI, CPI(M), CPI(ML), समाजवादी पार्टी एवं उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के नेता ने खुला खत द्वारा मालिन बस्तियों को ले कर सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाया। विपक्षी दलों का कहना है कि आई हुई खबरों के अनुसार, सात साल में शहरों में बस्तियों के नियमितीकरण और पुनर्वास अधिनियम पर राज्य सरकार ने कोई काम ही नहीं किया है। यह कानून पिछली कांग्रेस सरकार के समय में बनाया गया था लेकिन हैरतअंगेज बात है कि जहाँ तक देहरादून शहर की बात है, 2017 और 2021 के बीच में इस कानून के अमल के लिए एक बैठक तक नहीं रखी गई। अभी तक मात्र तीन ही बस्तियों का सर्वेक्षण हुआ है। किसी भी बस्ती का नियमितीकरण या पुनर्वास पर चर्चा तक नहीं की गयी है। लापरवाही का आलम यह है कि 2017 में शहर का क्षेत्रफल तीन गुना से ज्यादा बढ़ गया था, लेकिन आज तक नए क्षेत्रों में बसे मज़दूर बस्तियों का चिन्हीकरण तक नहीं किया गया है। अगस्त 2022 और अभी हाल ही में पुनः उच्च न्यायालय की और से बस्तियों को हटाने के आदेश आए हैं और सरकार उन आदेशों के बहाने “अतिक्रमण हटाओ अभियान” चला कर आम लोगों को प्रदेश भर में प्रताड़ित कर रही है। सरकार अपनी ही नाकामियों को छुपाने के लिए जनता को अपराधी ठहरा रही है, गरीब निरीह जनता के साथ इससे बड़ा छलावा नही हो सकता।
खुल खत द्वारा विपक्षी दलों ने इन मांगों को उठाये: सरकार अध्यादेश लाये कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर किसी को बेघर नहीं किया जायेगा,क्योंकि किसी भी परिवार को बेघर करने से बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्गों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है; सरकार युद्धस्तर पर 2016 के अधिनियम पर अमल करे; सरकार प्रदेश भर में वन अधिकार अधिनियम और अन्य नीतियों द्वारा लोगों के हक़ों को सुनिश्चित करे; सरकार न्यायालय के सामने चल रही याचिकाओं में हकीकत और सही क़ानूनी राय रखे।
गरिमा दसौनी, मुख्य प्रवक्ता, कांग्रेस।
राजेंद्र नेगी, राज्य सचिव, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)।
समर भंडारी, राष्ट्रीय कौंसिल सदस्य, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी।
इंद्रेश मैखुरी, राज्य सचिव, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मा – ले)।
डॉ एन एस सचान, राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी ।
नरेश नौडियाल, महासचिव, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी।



