उत्तर प्रदेश

महात्मा बुद्ध एक महान दार्शनिक और समाज सुधारक थे – अजीत सिंह।

शिकागो, अमेरिका। विवेक जैन। विश्वभर में बौद्ध धर्म के संस्थापक, महान दार्शनिक और समाज सुधारक महात्मा बुद्ध की जयंती को बौद्ध धर्म के 200 करोड़ से अधिक अनुयायियों ने बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया। इंड़ियन अमेरिकन बिजनेस कॉंउसिल के चेयरमैन अजीत सिंह ने बताया कि महात्मा बुद्ध का जन्म वैशाख माह की पूर्णिमा को हुआ था, जिस कारण इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। बताया कि यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसी दिन महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति और महानिर्वाण भी हुआ था और उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। बताया कि महात्मा बुद्ध कपिलवस्तु के राजा शुद्धोदन और महामाया के पुत्र थे। इनका जन्म नेपाल में लुंबिनी में हुआ था। इनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। गौतम गोत्र में जन्म लेने के कारण ये गौतम भी कहलाये। सिद्धार्थ गौतम के जन्म के सात दिनों बाद इनकी माता का निधन हो गया और सिद्धार्थ का पालन उनकी मॉं की छोटी बहन महाप्रजावती गौतमी ने किया। राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने गुरू विश्वामित्र से वेद, उपनिषद, राजकाज, युद्ध विद्या आदि की शिक्षा ग्रहण की। सिद्धार्थ गौतम कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान और रथ चलाने में महारथी थे। वह एक वीर योद्धा होने के साथ-साथ दया और करूणा की प्रतिमूर्ति थे। शिक्षा पूर्ण होने पर 29 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ गौतम का विवाह राजकुमारी यशोधरा के साथ हुआ। सिद्धार्थ गौतम को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम उन्होंने राहुल रखा। अजीत सिंह ने बताया कि सत्य दिव्य ज्ञान की खोज में और जीवन के सच को जानने के लिए राजकुमार सिद्धार्थ ने समस्त सुख-शांति, ऐश्वर्य-वैभव, राज्य और गृहस्थ जीवन का त्याग कर दिया। सात वर्षो तक वन में भटकते रहे। कठोर तप किया और अन्त में बिहार स्थित बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें सच्चा बोध हुआ और बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई इसी पीपल वृक्ष को बोधवृक्ष व बोधिवृक्ष कहा जाता है और वह राजकुमार सिद्धार्थ गौतम से महात्मा बुद्ध और फिर भगवान बुद्ध हो गये। महात्मा बुद्ध की शिक्षायें इतनी प्रभावशाली थी कि विश्व विजयी महान सम्राट अशोक सहित उस समय के बड़े-बड़े राजा और महाराजा तक उनके शिष्य हो गये।

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