उत्तराखंडदेहरादून

विपक्षी दलों एवं जन संगठनों की और से संयुक्त बयान।

चुनावी हिंसा, नफरत की राजनीती बर्दाश्त नहीं।

देहरादून : 10 जुलाई को मंगलौर उपचुनाव के दौरान हुई हिंसा शर्मनाक एवं आपराधिक है, इतनी गंभीर चुनावी हिंसा राज्य की इतिहास में पहली बार हुई है। इसके अतिरिक्त मौके पर पुलिस प्रशासन न होने के कारण विपक्षी प्रत्याशी को खुद घायलों को हॉस्पिटल तक ले कर जाना पड़ा। यह घोर निंदनीय है। हम सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति हमेशा लोकतान्त्रिक एवं शांतिपूर्ण रही है। लेकिन बीते सात साल से लगातार उत्तराखंड की जनता यह महसूस कर रही है कि वर्त्तमान सरकार और सत्ताधारी दल नफरत फ़ैलाने वाली ताकतों और हिंसक अपराधियों को संरक्षण दे रही है जिससे प्रदेश में हिंसा, संदेह और भय का माहौल देख जा सकता है,अब यह प्रयास चुनाव के दौरान भी दिखाई दे रहे है। इसलिए हम चाहते हैं कि संविधान और कानून के अनुसार इस घटना के लिए ज़िम्मेदार व्यक्तियों एवं संगठनों पर सख्त कार्यवाही की जाये और पूरी सुरक्षा एवं क़ानूनी व्यवस्था के साथ प्रभावित बूथों में पोलिंग दोबारा कराया जाये।

राजनीतिक दल

शीशपाल सिंह बिष्ट, प्रवक्ता, कांग्रेस एवं संयोजक, इंडिया गठबंधन एवं सिविल सोसाइटी।

डॉ SN सचान, राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी।

समर भंडारी, राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी।

इंद्रेश मैखुरी, राज्य सचिव, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मा – ले)।

नरेश नौडियाल, महासचिव, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी

जन संगठन।

भुवन पाठक, अजय जोशी एवं शंकर बरथवाल, संभावना समिति, उत्तराखंड।

राजीव लोचन साह, उत्तराखंड लोक वाहिनी।

शंकर गोपाल, विनोद बडोनी, राजेंद्र शाह, चेतना आंदोलन।

लेखराज, सीटू।

इस्लाम हुसैन, सर्वोदय मंडल।

तरुण जोशी, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा।

हीरा जंगपानी, महिला किसान अधिकार मंच।

मुनीश कुमार, समाजवादी लोक मंच।

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