आल-इण्डिया बैठक को बसपा सुप्रीमो ने किया सम्बोधित।
आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत : मायावती।

लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कु. मायावती द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पार्टी व मूवमेन्ट से सम्बन्धित पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रुरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अनुपालन करने की सख़्त हिदयात।
वैसे भी पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम के त्याग, तपस्या व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है जिसके लिए सत्ता भी ज़रूरी।
इसके अलावा, आर.एस.एस. (RSS) प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे में कही गयी बातों का भी संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती ने कहा कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने जातिवाद व असमानता आदि के विरुद्ध आजीवन कड़े संघर्षों के बल पर एससी, एसटी व ओबीसी समाज के
अर्थात् ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के आत्म-सम्मान तथा उनके वास्तविक हित, कल्याण व उनके लिये आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल एवं मज़हब की सुरक्षा तथा महिलाओं आदि के मामलों में भी आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने से उनमें विश्वसनीयता का अभाव है। अतः आरएसएस, बाबा साहेब के मानवतावादी व समतामूलक संविधान पर खुद ईमानदारी व निष्ठा से अमल करे और अपने लोगों पर उसपर अमल भी कराये, यही पूरी तरह से देश व जनहित में होगा।
साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश व दुनिया के ज्वलन्त मुद्दों पर भी पार्टी के लोगों का ध्यान आकृर्षित कराया।
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद तथा ’बहुजन समाज’ के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की प्रतीक बहन कु. मायावती द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व उनकी कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष के सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अनुपालन करने की भी सख़्त हिदायत दी गयी।
इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि बी.एस.पी., परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के आदर्श सिद्धान्तों व उच्च आदर्शों को लेकर चलने वाली उनके ’आत्म-सम्मान व स्वाभिमान’ के कारवाँ को सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समर्पित पार्टी एवं मूवमेन्ट है, जिसको लेकर कांशीराम ने उच्च वैज्ञानिक पद की अपनी सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी।
और फिर अपने माँ-बाप का घर, परिवार, रिश्तों-नातों आदि ये सब कुछ त्यागकर अपना पूरा जीवन कड़ा संघर्ष करते रहे और मुझे भी ख़ासकर शोषितों को जागरुक करने के लिए देश के कोने-कोने में भेजकर इस योग्य बनाया कि मैं, उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलते हुये, उनके अधूरे रहे कारवाँ को आगे बढ़ाने की पूरी त्याग व तपस्या में लगी रहूँ और अन्ततः उन्होंने मुझे बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बनाया। और मैंने भी उनके जीते-जी ही काफी हद तक अच्छा रिज़ल्ट लाकर भी दिखाया है और उनके संघर्ष को विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में यूपी में पूर्ण बहुमत की बी.एस.पी. सरकार बनाकर बहुजन मूवमेन्ट के मान-सम्मान को ऐतिहासिक व गौरवशाली भी बनाया है, जो सबकी ज़ुबान पर होने के साथ-साथ तथा यहाँ इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में भी दर्ज है।
इसके साथ ही, आदरणीया बहन कु. मायावती जी ने यह भी बताया कि बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम के संकल्प व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात् बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है और इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निजी तौर पर मेरा ना तो कोई अपना है और ना ही पराया। जो भी बी.एस.पी व बहुजनों के हित के काम करेगा उसका स्वागत व आभार भी है।
और इसीलिये जिस प्रकार कांशीराम ने अपने परिवार के लोगों व अन्य रिश्तों-नातों आदि को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दे दी थी, किन्तु उन्हंे चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद आदि देने के वे खिलाफ थे, उसी प्रकार से उस संकल्प पर मैं भी पूरी तरह से क़ायम हूँ। जिस पर अमल करते हुये ही मैंने आकाश आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाज़त दी है, जो हक़ीकत आप सभी लोगों के सामने है, लेकिन इस मामले में आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी ज़िम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुँचाने से बचने के लिये भी समय की ज़रूरत है।
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय में आयोजित इस आल-इण्डिया की बैठक को सम्बोधित करने से पहले बहनजी ने बी.एस.पी. सेन्ट्रल कैम्प कार्यालय में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व अन्य ज़िम्मेदार लोगों से राज्यवार समीक्षा बैठक की और उनसे उनके राज्यों में पार्टी संगठन की मज़बूती एवं पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के बारे में पिछली आल-इण्डिया की हुई बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली और उल्लेखित कमियों को समयबद्ध तरीके़ से दूर करने की भी हिदयात दी। ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब में ये कार्य चुनाव की घोषणा से काफी पहले ही पूरा करने के भी जरुरी निर्देश बहनजी ने पार्टी के लोगों को दिये, जिसके लिए उन्होंने 25 अगस्त को पंजाब स्टेट की व 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश स्टेट की अलग से पार्टी की बड़ी बैठक भी बुलाई, जिसकी जानकारी मीडिया बन्धुओं को भी है।
इसके साथ ही, बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम की अगले महीने दिनांक 9 अक्तूबर को पुण्यतिथि के अवसर पर यूपी मंे प्रदेश स्तर पर तथा बाकी राज्यों में ज़ोन-स्तर पर ’खुली संगोष्ठी के कार्यक्रम’ पूरी मिशनरी भावना से आयोजित करने के निर्देश देते हुये कहा कि इन कार्यक्रमों को बी.एस.पी. के प्रदेश व मुख्य ज़ोन प्रभारी आदि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि बी.एस.पी. दिल्ली प्रदेश के सभी लोग नई दिल्ली गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित ’बहुजन समाज प्रेरणा स्थल’, जहाँ कांशीराम की अस्थिकलश प्रतिष्ठापित है, वहाँ पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे।
इसके अलावा, यूपी-दिल्ली सीमा पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित भव्य ’बहुजन प्रेरणा केन्द्र’ में रख-रखाव का वर्तमान में सरकारी कार्य चलने के कारण इस वर्ष पश्चिमी यूपी के लोग भी, यूपी के बाकी सभी मण्डलांे के लोगों के साथ ही लखनऊ आकर यहाँ वीआईपी रोड पर, वहाँ ’बौद्ध स्मृति उपवन’ के सामने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित विशाल गुम्बद आकार के भव्य कांशीराम स्मारक स्थल’ पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे, जिस कार्यक्रम को पूरी मिशनरी भावना से सफल बनाना है। इसके साथ-साथ हर वर्ष की तरह बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन के मौके पर पार्टी को आर्थिक सहयोग देने के लिए भी ज़रूरी दिशा-निर्देश दिये गये, जिस पर पार्टी के लोगों ने अपनी सहमति भी जताई।
इसके अलावा, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान भारत की अनेकता में एकता आदि सम्बंधी कही गयी बातों का संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि भारत में ख़ासकर जातिवाद व असमानता तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अथक संघर्षों से एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के अर्थात देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के वास्तविक हित, कल्याण और उनके आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ महिलाओं, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा-सम्मान आदि के मामलों में आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने के कारण ही उनमें विश्वसनीयता का अभाव है तथा यह संगठन काफी पुराना होने के बावजूद वह मान्यता/सम्मान अर्जित नहीं कर पाया है जो वे चाहते हैं।
इसीलिये आरएसएस के लोग, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी, कल्याणकारी व समतामूलक संविधान में अपनी पूरी आस्था व निष्ठा रखते हुये उस पर खुद ईमानदारी से अमल करें और उसी के हिसाब से अपने लोगों को उस पर अमल करने को बाध्य भी करें तो यह पूरी तरह से देश व जनहित में होगा और देश अवश्य ही अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा को दूर करके विकास की ओर तेज़ी से अग्रसर होगा जो कि संविधान का मुख्य उद्देश्य भी है और जिसके लिये बी.एस.पी. की स्थापना की गयी है और सरकार में रहते हुये व सरकार में नहीं रहने पर भी लगातार संघर्षरत है, और यही देश की जातिवादी व जनविरोधी पार्टियों के खिलाफ बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी पहचान है।
जबकि अन्य पार्टियों की तरह कांग्रेस पार्टी तो हर मामले में जबरदस्त दलित व अम्बेडकर विरोधी पार्टी है, जिसका इतिहास किसी से छिपा नहीं है। ऐसी स्थिति में अब पार्टी ने पूरे देश में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले ही लड़ने का फैसला लिया है।
इसके साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस समय दुनिया के कई भागों में जारी जंग तथा उसके फलस्वरूप तेज़ी से बदलते हुये संगीन हालात व सुरक्षा उपायों आदि में भी भारत की अपनी नीति/रणनीति मज़बूत होनी चाहिये।
और अब फिर से देश में आएदिन बढ़ रही महंगाई व कुदरती हो रही मार भी काफी चिन्ताजनक है। साथ ही, वर्तमान में जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) आदि की भी चल रही गम्भीर समस्याओं को दूर करना बहुत ज़रूरी है। राज्यों के साथ-साथ खासकर केन्द्र सरकार भी इन सब मामलों को ज़रूर गम्भीरता से ले, तो यह देश व जनहित में उचित होगा।


