
पिथौरागढ़ : आईटीबीपी का जवान बहुत बड़ी साइबर ठगी का शिकार हुआ है. इस जवान के पास 64 करोड़ रुपए का टैक्स चुकाने का नोटिस आया है. पिथौरागढ़ साइबर सेल के इंस्पेक्टर नीरज भाकुनी ने सोशल मीडिया पर जागरूकता के उद्देश्य से इस साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है।
उत्तराखंड में सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड: उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले में एक साइबर ठगी का अनोखा मामला प्रकाश में आया है. यहां एक आईटीबीपी जवान साइबर ठगी का शिकार हुआ है. पूर्व में बेरीनाग थाने में तैनात एक पुलिस कर्मी भी ठगी का शिकार हो चुका है।
आईटीबीपी के एक जवान को मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन लोन की चाह भारी पड़ गई. लोन तो मिला नहीं, पर दो साल बाद जवान के घर जीएसटी का 64 करोड़ का रिकवरी नोटिस पहुंच गया. पिथौरागढ़ साइबर सेल के इंस्पेक्टर नीरज भाकुनी ने सोशल मीडिया पर जागरूकता के उद्देश्य से इस साइबर फ्रॉड का खुलासा किया।
साइबर सेल के इंस्पेक्टर नीरज भाकुनी ने बताया कि-कुछ समय पहले आईटीबीपी जवान ने इंस्टेंट लोन देने वाले एक मोबाइल ऐप पर आवेदन किया था. प्रक्रिया के तहत जवान ने अपने अहम पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बिजली बिल ऐप पर अपलोड कर दिए. बाद में ऐप पर लोन रिजेक्ट होने की बात कही गई. जवान इसे एक सामान्य बात समझकर भूल गया।
लोन ऐप के पीछे सक्रिय साइबर अपराधियों ने जवान के इन्हीं असली दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर एक फर्जी फर्म का रजिस्ट्रेशन करा लिया. ठगों ने इस फर्जी कंपनी का सालाना टर्नओवर कागजों में 100 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक दिखा दिया. इस फर्जी रजिस्ट्रेशन के आधार पर जीएसटी के फर्जी बिल तैयार किए गए और उन्हें अलग-अलग सेल (फर्जी) कंपनियों को बेच दिया गया. इन बिलों पर टैक्स की जो देनदारी बनी, वह 64 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
-नीरज भाकुनी, इंस्पेक्टर, पिथौरागढ़ साइबर सेल-
दो साल पहले 50 हजार के लोन के लिए किया था अप्लाई: साइबर सेल इंस्पेक्टर नीरज भाकुनी ने बताया कि ठगों के शिकार हुए आईटीबीपी जवान ने करीब दो साल पहले 50 हजार रुपये की जरूरत के लिए लोन ऐप पर अप्लाई किया था. करीब दो माह पहले ही परिजनों को जीएसटी विभाग की ओर से नोटिस मिला।
वस्तु एवं सेवा कर विभाग ने जब नियमों का हवाला देते हुए इस नोटिस को वापस लेने में असमर्थता जताई, तो परेशान होकर जवान की पत्नी ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई. एसपी के निर्देश पर जब साइबर सेल ने जांच की तो इस स्कैम की परतें खुली. साइबर सेल की जांच जारी है।
आईटीबीपी जवान के दस्तावेजों से साइबर ठगी: अक्षय प्रह्लाद कोंडे एसपी पिथौरागढ़ ने जवान की पत्नी की शिकायत पर साइबर सेल प्रभारी नीरज भाकुनी को जांच सौंपी. जांच में सामने आया कि जवान के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम से एक फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया गया था. राज्य कर विभाग की जांच में भी यह पुष्टि हुई कि संबंधित फर्म जवान के नाम पर संचालित दिखाई जा रही थी।
64 करोड़ का जीएसटी रिकवरी नोटिस देख उड़े होश: रिकार्ड में फर्म का 100 से 500 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर दर्शाया गया था. इसके अलावा फर्म के नाम पर बड़े पैमाने पर शेयरों की खरीद-फरोख्त और अन्य वित्तीय लेनदेन भी थे. इन्हीं गतिविधियों के आधार पर विभाग ने जवान को 64 करोड़ रुपये का जीएसटी रिकवरी नोटिस जारी किया. साइबर जांच में पूरा मामला फर्जी पाया गया. अभी मामले में पुलिस जांच जारी है।
एप डाउनलोड करने से पहले ध्यान रखें: भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार हर एक बैंक के ऑनलाइन ऐप को डाउनलोड करने के लिए कई तरह की सुरक्षित जानकारियां दी जाती हैं. मसलन संबंधित बैंक ऐप का ओरिजिनल Logo, बैंक से जुड़े स्पेशल कंटेंट जैसी आवश्यक जानकारी वास्तविक ऐप की पहचान है।
बैंक का ऑरिजनल ऐप डाउनलोड करने में एक और जानकारी आवश्यक है. जो बैंक का वास्तविक ऐप होगा उसकी डाउनलोड की संख्या हजारों और लाखों में होगी, जबकि फेक ऐप जो इंटरनेट सर्च इंजन से डाउनलोड होता है, उसकी संख्या महज 200-300 तक हो सकती है. ऐसे संबंधित ऑनलाइन बैंक ऐप डाउनलोड करने का तरीका बैंक जाकर ऑफिशियल ऐप को डाउनलोड करने में सुरक्षा है।
पासबुक में करें एंट्री: बैंक खाता धारकों को बेहद सतर्क होने की आवश्यकता है. जब भी पैसा जमा या निकाला जाए, उसकी पासबुक एंट्री बेहद जरूरी है. साथ ही इस बात की भी निगरानी अवश्य करनी चाहिए कि जितने भी बैंक से लेनदेन होते हैं, उनकी नियमित रूप में पासबुक एंट्री अपडेट और खासकर मैसेज अलर्ट जरूर अपने पास रखें. जिस खाताधारक के पास यह सुविधा नहीं है, वो बैंक से अपने खाते में मोबाइल नंबर तत्काल अपडेट कर हर ट्रांजेक्शन के मैसेज पर अपडेट लेता रहे।
अकाउंट से पैसे उड़ें तो ये करें: अगर बैंक अकाउंट में किसी तरह का फ्रॉड हो जाता है, तो इसकी जानकारी तत्काल बैंक के संबंधित अधिकारी और उत्तराखंड साइबर क्राइम पुलिस के फाइनेंशियल फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर 1930 में देनी आवश्यक है. इससे समय रहते जमा पूंजी की रिकवरी करने के लिए कार्रवाई की जा सकेगी।
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बैंक या अन्य तरफ से ऑनलाइन साइबर ठगी होने की काफी देर बाद शिकायत दर्ज कराई जाती है. इस कारण सबसे बड़ी समस्या धोखाधड़ी में गंवाई गई धनराशि को रिकवर करने में आती है. किसी तरह का भी फ्रॉड होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 से साइबर क्राइम पुलिस को सूचना मिलेगी. उसके तत्काल बाद ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी. उस क्राइम में बैंक कर्मी भी शामिल होता है तो उसे भी गिरफ्तार जेल भेजा जाएगा।



