उत्तराखंडदेहरादून

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति पर खत्री का हमला।

देहरादून : बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी मामले में मुख्य कार्याधिकारी द्वारा आरोपित कार्मिक को भेजे नोटिस में CCTV फुटेज की अस्पष्टता के उल्लेख पर भैरव सेना के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दान-चढ़ावे की गणना स्थल के CCTV कैमरे से कोई चीज स्पष्ट नहीं दिख रही है तो फिर पूरी व्यवस्था का तो भगवान ही मालिक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के उजागर होने के बाद मंदिर समिति येनकेन प्रकारेण इसे दबाने पर तुली हुई है। शुरू में मंदिर समिति ने घटना के होने से ही इनकार कर दिया था। उसके पश्चात मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बयान दिया कि CCTV फुटेज स्पष्ट नहीं है। फिर अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मामले की जांच के लिए एक चार सदस्यीय जांच कमेटी की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि मंदिर समिति अध्यक्ष द्विवेदी ने एक सप्ताह के भीतर जांच सम्पादित करने की घोषणा की थी। मगर जानकारी में आया है कि अभी तक कथित जांच समिति बदरीनाथ पहुंची भी नहीं है।

खत्री ने कहा कि इस बीच बवाल बढ़ता देख मुख्य कार्याधिकारी रांगड़ ने आरोपित कार्मिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दिनांक रहित इस नोटिस में कार्मिक से 48 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

नोटिस में लिखा है कि मुख्य कार्याधिकारी द्वारा CCTV की फुटेज की समीक्षा के दौरान संज्ञान में आया कि दान-चढ़ावे की गिनती के स्थान पर कार्मिक ने अपने मोबाईल के साथ कुछ अन्य वस्तु भी अपने नियंत्रण में रखी, जो कि CCTV कैमरा में देखा गया है।

खत्री ने सवाल किया कि जब दान-चढ़ावे की गिनती वाले स्थान पर लगे कैमरे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि उक्त कार्मिक ने मोबाईल के साथ क्या रखा, तो फिर वहां पर लगे CCTV कैमरों का क्या औचित्य है ? क्या वह कैमरे केवल दिखने के लिए लगाए गए हैं ?

खत्री ने कहा कि मंदिर समिति अध्यक्ष द्विवेदी द्वारा गठित जांच समिति का कोई औचित्य भी नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि जांच समिति के नाम पर सबूतों से छेड़छाड़ और सबूतों को नष्ट किया जा सकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की है कि बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी मामले में CCTV रिकॉर्ड और अन्य सबूतों से कोई छेड़छाड़ हो, उससे पहले प्रदेश सरकार को सब कुछ अपने कब्जे में ले लेना चाहिए। उन्होंने घटना के पांच दिन बाद भी प्रदेश सरकार की ओर से मामले में किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं आने पर आश्चर्य जताया।

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