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संसद ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक को दी मंजूरी।

नई दिल्ली : संसद ने बुधवार को उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया तथा सरकार ने आश्वासन दिया कि इस समुदाय के लोगों की गरिमा को बरकरार रखा जाएगा और उनके खिलाफ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा.उच्च सदन में इस विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है. राज्यसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सभी सदस्यों ने उभयलिंगी समुदाय के लोगों के कल्याण को लेकर समान रूप से चिंता जतायी।

मंत्री ने कहा कि यह विधेयक केवल कानून नहीं बल्कि उनकी न्याय की पुकार है. उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार समाज के सभी लोगों के उत्थान और उन्हें आगे लाने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्री ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून उभयलिंगी लोगों को सशक्त बनाने वाला है और उस समुदाय को उसका गौरव लौटाएगा, जिसे सदियों से वंचित रखा गया था।

उन्होंने उल्लेख किया कि 2019 में उभयलिंगी व्यक्तियों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए एक कानून लाया गया था और अब यह संशोधन विधेयक जटिल प्रावधानों में बदलाव कर उन लोगों को सुरक्षा देने के लिए लाया गया है, जिनकी अपनी लैंगिक पहचान निर्धारित करने में खुद की कोई गलती नहीं होती।

उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि इस समुदाय के लोग भी समानता के साथ जिएं। उन्हें भी अन्य लोगों की तरह अधिकार मिलें।’’ उन्होंने कहा कि यह कदम सभी वर्गों को एक समान बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

मंत्री ने कहा, ‘‘इस कानून का उपयोग केवल उन्हीं लेागों के लिए किया जाएगा, जिन्हें वास्तव में सुरक्षा की आवश्यकता है’ उचित कानून के अभाव में उन्हें (उभयलिंगी) गंभीर सामाजिक बहिष्कारों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक समुदाय के एक विशिष्ट वर्ग में ऐसी असुरक्षा का समाधान करने के लिए लाया गया है, जो जैविक स्थिति के कारण गंभीर सामाजिक बहिष्कार का सामना करते हैं और जिनमें उनकी कोई गलती नहीं होती।

कुमार ने उल्लेख किया कि एक दशक पूर्व उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि उभयलिंगी लोगों की पहचान को मान्यता न देना संविधान का हनन है, मंत्री ने कहा कि उभयलिंगी गंभीर सामाजिक असुरक्षा का सामना करते हैं इसलिए उनके लिए यह व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस विधेयक के माध्यम से पहली बार दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए हैं. किसी भी तरह का प्रलोभन या उकसावे के जरिये किसी बच्चे को उभयलिंगी के रूप में खुद को प्रदर्शित करने के लिए मजबूर करना अब दंडनीय अपराध होगा.’’मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून में बच्चों को हानि पहुंचाने से रोकने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित कानून स्पष्ट संदेश देता है कि समाज बच्चों के साथ होने वाले किसी भी दुर्व्यवहार को सहन नहीं करेगा, उन्होंने कहा कि इसके कानून का रूप लेने से प्रशासनिक स्पष्टता आएगी, समुदाय के अधिकार सुनिश्चित होंगे और उभयलिंगी लोगों को सामाजिक मान्यता मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि सरकार इस समुदाय के लोगों के लिए सामाजिक समावेशन के लिए विभिन्न स्तर पर काम हो रहा है. उन्होंने एक सरकारी कैंटीन का उल्लेख किया जिसे इस समुदाय के लोग चला रहे हैं, वहीं एक स्मारक वस्तुओं की दुकान चलाने का जिम्मा भी इसी समुदाय के एक व्यक्ति को दिया गया।

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