अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला 2026 का उपराष्ट्रपति ने किया शुभारंभ।

फरीदाबाद : आज से सूरजकुंड मेले का आगाज हो गया है. उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने मेला साथी मोबाइल ऐप को लॉन्च किया. इस ऐप के जरिए मेले की सारी जानकारी मिल सकेगी. जैसे कि कहां किस चीज का स्टॉल लगा है. कहां पार्किंग है. कहां खाने के स्टॉल है. इस तरह की सारी जानकारी मोबाइल ऐप से मिल सकेगी।
सूरजकुंड मेले का शुभारंभ: मेले के शुभारंभ के बाद उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मेले परिसर में हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया. जहां हरियाणवी पगड़ी पहनाकर उनका पारंपरिक स्वागत-सत्कार किया गया. उपराष्ट्रपति ने मेले के थीम स्टेट मेघालय के स्टॉलों का अवलोकन कर शिल्पकारों से संवाद किया तथा उनके हुनर की सराहना की।
इसके साथ ही उन्होंने मेले में सहभागी विभिन्न देशों और राज्यों की सांस्कृतिक विधाओं का अवलोकन कर कलाकारों एवं शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया.इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉक्टर अरविंद शर्मा ने उपराष्ट्रपति को पांचजन्य शंख और महाभारत के दृश्य को दर्शाती एक आकर्षक पेंटिंग भेंट की।
उपराष्ट्रपति का संबोधन: मेले को उद्घाटन के बाद उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि “सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है. ये उत्सव वसुधैव कुटुंबकम के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है।
ये मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढ़ने वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्रित करता है. पिछले लगभग चार दशकों से ये आयोजन हमारे कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं को जीवित रखे हुए हैं. इस वर्ष आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित दृष्टिकोण ने मेले के महत्व को और भी गहन बना दिया है, क्योंकि हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव है।
‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से सशक्त हो रहा कारीगर समुदाय’: उपराष्ट्रपति ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प क्षेत्र को राष्ट्रीय पुनर्जागरण के केंद्र में रखा गया है. प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना जैसे परिवर्तनकारी प्रयासों ने कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल विकास, वित्तीय सहायता और बाज़ार से जुड़ाव प्रदान कर पूरे इकोसिस्टम को सशक्त बनाया है।
‘विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति’: उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के सहभागी राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय का उल्लेख करते हुए कहा कि ये एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करते हैं, जहां विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है. साथ ही, भागीदार देश मिस्र का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि मिस्र की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक परंपराएं भारत की ऐतिहासिक यात्रा से गहरे स्तर पर मेल खाती हैं. ऐसी साझेदारियां देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत बनाती है।
आमजन से जुड़ा है मेला: उपराष्ट्रपति ने कहा कि “बड़े पैमाने पर उत्पादन के इस युग में सूरजकुंड मेला हमें हाथ से बनी वस्तुओं, मानवीय स्पर्श और प्रामाणिक शिल्प के अमूल्य महत्व की याद दिलाता है. पिछले वर्ष लगभग 15 लाख लोगों ने मेले का भ्रमण किया, जो यह दर्शाता है कि यह मेला आमजन से गहराई से जुड़ा हुआ है. मेले में कारीगरों के उत्पादों की बिक्री प्रतिदिन बढ़ती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सूरजकुंड मेला न केवल सांस्कृतिक रूप से, बल्कि व्यावसायिक दृष्टि से भी अत्यंत सफल और प्रभावशाली आयोजन है।
‘सूरजकुंड मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम’: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि “सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का सजीव संगम है. पिछले 38 वर्षों से यह मेला भारतीय लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी और वैश्विक मंच से भी जोड़ रहा है।
इस वर्ष की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को साकार करती है, जिसके तहत देश के हर कोने में बसे हुनरमंद कारीगर के हाथों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके.” मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति पर गर्व, अपनी विरासत का संरक्षण और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का संकल्प है. सूरजकुंड शिल्प मेला इसी आत्मनिर्भरता का जीवंत और प्रेरक प्रतीक है।
‘सहयोग और समागम से समृद्ध होती हैं सभ्यताएं’: मुख्यमंत्री ने कहा कि सभ्यताएं समागम और सहयोग से ही समृद्ध होती हैं. इसलिए, इस दिशा में दुनिया के दूसरे सभी देशों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि “इस बार सूरजकुण्ड शिल्प मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक समृद्ध हो रहा है, जिसमें सहयोगी देश के रूप में हमारे मित्र राष्ट्र मिस्र की विशेष भागीदारी रहेगी. मिस्र विश्व की प्राचीनतम और गौरवशाली सभ्यताओं में से एक है।
जोकि आधुनिकता के साथ साथ अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ अफ्रीका और मध्य पूर्व के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक सेतु की भूमिका निभा रहा है. इसके साथ ही भागीदार राज्यों के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय की सहभागिता मेले की विविधता को और विस्तार देगी. उत्तर प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं तथा मेघालय की अनोखी मातृसत्तात्मक संस्कृति और जनजातीय विरासत इस मेले को रंगों, परंपराओं और संस्कृतियों का जीवंत उत्सव बनाएंगी. यह सांस्कृतिक सहभागिता ही वह सेतु है, जो राज्यों और देशों के बीच दूरियों को मिटाकर आपसी सौहार्द और एकता को सुदृढ़ करती है।
‘अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति बढ़ रहा विश्वास’: उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रमाण मेले में बढ़ती वैश्विक भागीदारी है. उन्होंने कहा कि पिछली बार आयोजित 38वें सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में जहां लगभग 44 देशों ने मेले में भाग लिया था, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि और प्रतिभागी सूरजकुंड शिल्प मेले में शामिल हो रहे हैं, जो इस आयोजन के प्रति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने कलाकारों के साथ गाया लोक गीत: हरियाणा के पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने मेले में कलाकारों के साथ लोकगीत गुनगुनाया. इस दौरान उन्होंने कलाकारों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया।
उत्तर प्रदेश और मेघालय स्टेट पार्टनर: पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने बताया कि “पार्टनर नेशन के तौर पर इजिप्ट चौथी बार शिल्प महोत्सव में अपनी प्राचीन कला एवं संस्कृति के साथ पर्यटकों को आकर्षित करेगा, जबकि थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक एवं लोक कलाओं का प्रदर्शन मेला परिसर में किया जाएगा. गत वर्ष 44 देशों के 635 प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था, इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 800 प्रतिभागी शामिल होंगे।
1300 से ज्यादा स्टॉल: पर्यटन मंत्री डॉक्टर अरविंद शर्मा ने बताया कि “शिल्प महोत्सव में 1300 से अधिक स्टॉल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बुनकरों, शिल्पकारों तथा पारंपरिक शिल्प प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए आवंटित किए गए हैं. इस बार मेले में 50 से अधिक देशों के लगभग 800 प्रतिभागी शामिल होने की उम्मीद है।
लोकल टू ग्लोबल मेले की थीम: हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि “39 वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव दुनिया के सांस्कृतिक एवं पर्यटन मानचित्र पर मजबूत दस्तक देगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत संकल्प से सिद्धि तक ले जाने के उद्देश्य के साथ यह शिल्प महोत्सव राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, हस्तशिल्पियों और बुनकरों की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करेगा और वैचारिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देगा. इसके लिए मूल मंत्र लोकल से ग्लोबल–आत्मनिर्भर भारत की पहचान होगा।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे राज्यपाल: विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बुधवार को हरियाणा सिविल सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में 39 वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव की तैयारियों को लेकर विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल और निदेशक पर्यटन पार्थ गुप्ता के साथ पत्रकार वार्ता को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि “16 दिन तक चलने वाले शिल्प महोत्सव का समापन 15 फरवरी को होगा, जिसमें राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष मुख्य अतिथि होंगे।
सीसीटीवी के जरिए निगरानी: मेला क्षेत्र में सिक्योरिटी का खास ध्यान रखा जा रहा है. पिछली बार के मुकाबले इस बार ज्यादा कैमरा लगाए गए हैं, ताकि हर इलाका अच्छे से कवर हो. मेला क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए 7 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जा रहे हैं. ताकि मेला परिसर ज्यादा आकर्षक दिखे और लोगों की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में सुविधा हो. मेला परिसर में पार्किंग सहित अन्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
1977 में सूरजकुंड क्राफ्ट मेले की शुरुआत: पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि “1977 में सूरजकुंड क्राफ्ट मेले की शुरुआत हुई. पर्यटन सहित सभी विभाग इस कार्य में जुटा हुआ है. इस बार 40 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में मेले का आयोजन किया जा रहा है. मेले को लेकर हर साल लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है. 39 वें सूरजकुंड मेले में इस बार 50 से ज्यादा देश शामिल होंगे. इससे स्टॉल लगाने वालों को फाइनेंशियल फायदा होगा और ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल ऑर्डर भी मिलेंगे. मेला हमारे आर्टिस्ट को आगे बढ़ाने का अच्छा प्लेटफॉर्म है. विकसित भारत के लिए ये अच्छा कदम साबित होगा. पिछले साल 1 करोड़ 80 लाख रुपये की सेल सिर्फ जेल विभाग की हुई थी।


