अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध में 28 फीसदी से अधिक की वृद्धि।

नई दिल्ली : राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के नवीनतम आंकड़ों से पता चला है कि भारत में 2023 में हत्या के 27,721 मामले दर्ज किए गए. ये 2022 से 2.8 प्रतिशत कम है जबकि इसी अवधि के दौरान अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में साइबर अपराधों में 31.2 फीसदी की वृद्धि हुई. पूर्व में दर्ज 65,893 मामलों की अपेक्षा उस साल 86,420 सामने आए. अपराधों और प्रवृत्तियों के राष्ट्रीय रिकॉर्ड कीपर ने खुलासा किया कि 2022 में भारत में हत्या के 28,522 मामले दर्ज किए गए जो 2023 में घटकर 27,721 रह गए, यानी 2.8 प्रतिशत की गिरावट आई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्या के तीन कारण प्रमुख रूप से रहे. इनमें ‘वर्ष 2023 के दौरान हत्या के सबसे अधिक मामलों में ‘विवाद’ (9,209 मामले) मकसद था, इसके बाद ‘व्यक्तिगत प्रतिशोध या दुश्मनी’ (3,458 मामले) और ‘लाभ’ (1,890 मामले) का स्थान रहा।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में 28.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2022 में 10,064 मामले दर्ज किए गए जो 2023 में बढ़कर 12,960 हो गए. इस श्रेणी में कुल अपराध दर भी 2022 में 9.6 से बढ़कर 2023 में 12.4 हो गई।
एनसीआरबी के अनुसार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार अपराध दर प्रति लाख जनसंख्या पर है. रिपोर्ट में कहा गया, ‘महानगरों के लिए अपराध दर की गणना 2011 की वास्तविक जनसंख्या जनगणना के आधार पर की गई है. साधारण चोट से संबंधित धाराएँ कुल मामलों का 21.3 प्रतिशत हैं. इसके बाद दंगों के 1707 मामले, कुल एफआईआर का 13.2 प्रतिशत और बलात्कार के 1189 मामले हैं जो कुल संख्या का 9.2 प्रतिशत है.।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष के दौरान साइबर अपराध की दर 4.8 प्रतिशत से बढ़कर 6.2 प्रतिशत हो गई. 2023 में 68.9 प्रतिशत साइबर अपराध नागरिकों को ठगने के उद्देश्य से किए गए जो कुल 86,420 मामलों में से लगभग 59,526 थे. इसके बाद यौन शोषण के 4.9 प्रतिशत मामले थे, जिनमें 4,199 मामले थे. साथ ही जबरन वसूली के 3.8 प्रतिशत मामले थे जिसका आंकड़ा 3,326 था।
देश भर में 2023 में 62,41,569 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए. आईपीसी के तहत 37,63,102 और विशेष और स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत 24,78,467 मामले दर्ज किए गए. रिपोर्ट में कहा गया कि 2022 में रिपोर्ट दर्ज कराने में 7.2 फीसदी यानी 4,16,623 की वृद्धि हुई. 2022 में कुल 58,24,946 मामले रजिस्टर कराए गए. प्रति लाख जनसंख्या पर दर्ज अपराध दर 2022 में 422.2 से बढ़कर 2023 में 448.3 हो गई है।
आईपीसी के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के तहत अधिकांश मामले ‘पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता’ (1,33,676 मामले, 29.8फीसदी) और ‘महिलाओं का अपहरण’ (88,605 मामले, 19.8फीसदी) के तहत दर्ज किए गए. इसके बाद ‘महिलाओं पर उनकी शील भंग करने के इरादे से हमला’ (83,891 मामले, 18.71फीसदी) और ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO)’ (66,232 मामले, 14.8फीसदी) का स्थान रहा।
19 महानगरीय शहरों में 2023 में कुल 9,44,291 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए जो 2022 की तुलना में 10.6 प्रतिशत अधिक है जब 8,53,470 मामले दर्ज किए गए थे. इसमें कहा गया है कि महानगरों में कुल मामलों में से 6,67,351 आईपीसी अपराधों के तहत और 2,76,940 मामले विशेष एवं स्थानीय कानून (एसएलएल) अपराधों के तहत दर्ज किए गए।
वर्ष 2023 में महानगरीय शहरों में दर्ज अपराधों में ‘चोरी’ के तहत सबसे अधिक 44.8 फीसदी मामले दर्ज किए गए. इसके बाद ‘सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाने’ के अंतर्गत 9.2 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए. इसके तहत 61,570 मामले दर्ज किए गए तथा सार्वजनिक मार्ग पर बाधा डालने के अंतर्गत 8.1 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए. इनमें 53,742 मामले दर्ज किए गए।
