उत्तराखंडदेहरादून

सैकड़ों प्रभावितों ने किया एलिवेटेड रोड़ का विरोध।

देहरादून : बस्ती बचाओ आन्दोलन की ओर से आज सैकड़ों प्रभावितों ने एलिवेटेड रोड़ के विरोध में तथा बाढ़ प्रभावित को समुचित सहायता की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री ,जिलाधिकारी देहरादून को ज्ञापन दिया तथा सड़क ,निकासियों ,अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था,सार्वजनिक परिवहन के अभाव में घण्टों जाम की समस्या के बारे में उन्हें ज्ञापन दिया तथा परिणामस्वरूप नागरिक समाज काफी परेशान है ,सरकारी, गैर सरकारी तथा धार्मिक आयोजनों एवं धार्मिक जलूसों के कारण शहर की हालात अस्त व्यस्त रहती है । राजपुर से घण्टाघर,दर्शनलाल चौक से प्रिन्स चौक ,रेलवे स्टेशन से सहारनपुर चौक, कांवली रोड़ से बल्लीवाला चौक ,रिस्पना ,आईएसबीटी की यातायात व्यवस्था की स्थिति अत्यधिक गम्भीर है जहॉ आवागमन में घण्टों लग जाते हैं ।आन्दोलन की ओर से मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी दिये ज्ञापन में आन्दोलन ने कहा नागरिकों पर आर्थिक दण्ड ,चालक परिचालकों ,परिवहन व्यवसायियों ,रेहड़ी पटरी वालों का उत्पीड़न कर समस्या का समाधान नहीं निकल सकता है ।परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिऐ तैनात पुलिस अधिकारियो ं एवं कर्मियों ठीकठाक प्रशिक्षित करने , उनकी संख्या बढा़ने तथा देखभाल की आवश्यकता है । मूलभूत समस्याओं का समाधान फ्लाईओवर,ओवरफुट ब्रिज तथा एलिवेटेड रोड़ न होकर बल्कि शहर की आन्तरिक सड़कों ,निकासिंयोंं ,चौराहों ,फुटपाथों ,बस /बिक्रम ,आटो स्टेण्डों ,स्टोपेज , पार्किंग व्यवस्था व्यवस्थित करने की है तथा कहा आपकी सरकार ‌ राजस्व कमाने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढावा देने के नीजि वाहनों को बढावा दे रही है जो घण्टों जाम के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है आज कई घरों में तो प्रत्येक सदस्य के पास निजी वाहन हैं जो न केवल आवासीय कालोनियों के लिए बल्कि शहरी एव कस्वाई यातायात के लिए समस्याओं बने हुऐ ,वे न केवल आपसी हिंसा बल्कि दुर्घटनाओं के कारण बने हुऐ ‌नाबालिग एवं किशोर,नशा कर वाहन चलाना तथा मोबाईल चलाकर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वालों पर नकेल नहीं ।

आन्दोलन ने कहा है कि, शहर के अन्दर अत्यधिक धार्मिक आयोजन /सरकारी गतिविधियां तथा सत्ता से जुड़े रैलियों पर स्थानीय प्रशासन नियन्त्रण नहीं कर पाता जो एक बड़ी समस्या है ।ऐ सभी यातायात ठप्प के कारक हैं ।ज्ञापन में कहा गया है कि,इससे पूर्व भी जनता के मध्य स्मार्ट सिटी परियोजना को देहरादून का कायाकल्प होगा किन्तु परियोजना में गैर जबाबदेहि के परिणामस्वरूप भारी भ्रष्टाचार ,अदूरदर्शिता ने देहरादून को और ज्यादा बदरंग कर किया तथा पर्यावरण व पेड़ो को भारी नुकसान पहुंचाया खामियाजा पूरे शहर ने इस बर्षात में भुगतना पड़ है । आन्दोलन ने कहा है कि,आज एलिवेटेड रोड़ परियोजना का प्रचार जोर पर है कहा जा रहा है कि यह देहरादून की जनता को जाम से निजात दिलायेगा स्मार्ट सिटी की तरह हई एक जुमला है ।कभी स्मार्ट सिटी परियोजना का इसी तरह जोरशोर से प्रचार हुआ था । मान्यवर ,हमारी स्पष्ट राय है कि एलिवेटेड रोड़ परियोजना चन्द योजनकारों के हित लाभों को पूरा तो करती है किन्तु देहरादून की जनता के लिए इसका कोई लाभ नहीं है ।यह योजना भारी विस्थापन एवं पर्यावरण कै लिए भारी क्षति पहुंचाएगी बावजूद बिस्थापित होने वाले गरीबों में जनसुनवाई के माध्यम अधिकारीगण ,माननीय विधायकगण एवं पार्षदगण यह समझा रहे हैं देहरादून के यातायात सुधारने कै लिए आप लोगों हटना जरूरी है ,जबकि एक प्रभावित परिवार एवं नागरिक समाज एलिवेटेड रोड़ कै पक्ष में नहीं है ।

ज्ञापन में कहा गया है कि ,स्मार्ट सिटी परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार के बाद यह योजना नेपथ्य में चली गई ,अब एलिवेटेड रोड़ परियोजना जो कि आपका( माननीय मुख्यमंत्री जी) का स्वप्न योजना (dream project) कहकर प्रचारित किया जा रहा है ,रिस्पना-बिन्दाल क इर्दगिर्द बसि गरीब जनता को बेदखल करने कै अलसे वायदा कर रहे थे आप हमें जिताओ,हम आपको मालिकाना हक देंगे ,जुमला साबित हुआ है ।अब आपकि सरकार , विधायक ,पार्षद एलिवेटेड रोड़ का फायदा गिनाकर गरीबों हटने के लिऐ कह रहे ,जो कि प्रभावितों को मंजूर नहीं है ।

ज्ञापन में कहा गया है कि संज्ञान में आया है कि 178 से अधिक सीसीटीवी कैमरे कार्य नहीं कर रहे, जलभराव की समस्या, खराब सड़क आम बात है,750 करोड़ रुपये के व्यय के बावजूद नागरिकों को स्मार्ट सिटी ठोस लाभ नहीं मिला ,सिटीज 2.0 योजना के लिऐ देहरादून का चयन न होना, जिससे 119 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फण्ड देहरादून को नहीं मिल सका।

· मान्यवर ,रिस्पना-बिन्दाल एलिवेटेड रोड

व्यापक पेड़ों की कटाई, भूस्खलन का खतरा, नदी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा तथा स्थानीय निवासियों के विस्थापन के खतरे का कारण बनेगा तथा इस योजना में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 का पालन न होना (SIA, जनसुनवाई जनता की परियोजना के प्रति पूर्णतः असहमति है बावजूद आपकि सरकार योजना पर 6,200 करोड़ रुपये की अत्यधिक लागत को हरहाल में खर्चा करने कै लिऐ तैयार है ।

एलिवेटेड ज्ञापन में बस्ती बचाओ आन्दोलन ने निम्नलिखित बिंदुओं को उठाया

_(1) सड़कों ,निकासियों ,फुटपाथ ,चौक चौराहों ,बस स्टोपेज ,बस अढ़्ढों ,सार्वजनिक सुविधाओं,सार्वजनिक एवं जनता को सस्ता परिवहन उपलब्ध कराना, गड्ढों को भरने के लिए सामग्री, सफाई अभियानों के लिए उपकरण खरीदने पर खर्चा किया जाये ।

(2)स्थानीय युवाओं/समूहों को ट्रैफिक प्रबंधन, पार्क रखरखाव आदि के लिए प्रोत्साहित करना।

सरल ऐप्स के माध्यम से नागरिकों से समस्याओं (जैसे गड्ढे, कूड़ा) की रिपोर्टिंग पर खर्चा किया जाये

(3) कार्यशील सीसीटीवी कैमरों की ऑडिट व मरम्मत – जलभराव वाले स्थानों की पहचान व सफाई यातायात में सुधार, सुरक्षा बढ़ाना, मानसून की तैयारी पहले कि जाये ।

(4 (Footpaths) का सुधार – सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना (ई-बसों का विस्तार) – हरित अंतराल (Green spaces) का विकास टिकाऊ Mobility, पर्यावरण में सुधार, जीवन-स्तर में वृद्धि

(5) एलिवेटेड रोड जैसी महंगी परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन – व्यापक SIA और जनसुनवाई के आधार पर निर्णय कानूनी अनुपालन, सामाजिक स्वीकृति के बाद किया जाना चाहिए था जिसका किसी भी स्तर से पालन नहीं किया यहां तक इस परियोजना न तो सामाजिक एवं प्रभावितों की स्वीकृति कतई नहीं है।

(6)जब सरकार, देहरादून का जिला प्रशासन, नगरनिगम,एमडीडीए एनजीटी एवं हाईकोर्ट उत्तराखण्ड में नदी प्रवाह को मुक्त करने का शपथ पत्र दे रहा दूसरी ओर वही जनविरोधी ,पर्यावरण विरोधी तथा नदी का प्रवाह रोकने वाली एलिवेटेड रोड़ बनाने की पुरजोर कोशिश क्यों कर रहे,जबकि आपने स्वयं प्रभावित गरीबों को न हटाने तथा मालिकना हक वायदा कर वोट प्राप्त किये थे ।_ *ज्ञापन माननीय मेयर नगरनिगम एवं तहसीलदार सदर को दिया उन्होंने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया ।*

प्रदर्शन में प्रमुख रूप से बस्ती बचाओ आन्दोलन के संयोजक अनन्त आकाश ,जनवादी महिला समिति कि उपाध्यक्ष नुरैशा अंसारी, उत्तराखण्ड आन्दोलनकारि के संयुक्त परिषद संरक्षक नवनीत गुंसाई ,नेताजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल,बस्ती बचाओ आंदोलन के विप्लव अनन्त ,सुरेश नेगी ,माला ,नसरीन ,नितेश रंजन ,शहनाज ,मजनून ,फरिदा ,शहजादी ,शबीना ,हेमा देवी ,देवपतिदेवि,इन्दिरा सन ,उर्मिला ,चन्द्र कला ,अय्यान ,,रामदेव ,कमरजहां आदि बड़ी संख्या में प्रभावित शामिल थे ।

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