नई दिल्ली

थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम में 25% बीमा वृद्धि से नाराज़ ट्रांसपोर्टर्स, केंद्रीय मंत्री गडकरी से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग।

नई दिल्ली : थर्ड-पार्टी मोटर बीमा प्रीमियम में संभावित 18 से 25 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी के प्रस्ताव ने देशभर के परिवहन क्षेत्र में गहरी चिंता पैदा कर दी है. इसको लेकर ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से शिकायत की है. एसोसिएशन ने शिकायती पत्र के माध्यम से इस प्रस्तावित वृद्धि को तत्काल स्थगित करने की मांग की है. इसके साथ ही इस निर्णय के दूरगामी नकारात्मक प्रभावों को भी बताया है।

बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी का प्रस्तावः ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने 2025–26 के लिए थर्ड-पार्टी मोटर बीमा प्रीमियम में औसतन 18 प्रतिशत की वृद्धि का सुझाव दिया है. कुछ श्रेणियों जैसे मालवाहक व वाणिज्यिक वाहनों के लिए ये वृद्धि 25 प्रतिशत तक हो सकती है. मंत्रालय द्वारा इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. बहुत जल्द ही इस पर निर्णय लेने की संभावना है।

ट्रांसपोर्टरों पर बढ़ेगा बोझः ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर का कहना है कि यह प्रस्ताव पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे लाखों ट्रांसपोर्टरों, ड्राइवरों व छोटे ऑपरेटरों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा. डीजल, टोल व अनुपालन लागत की बढ़ोतरी के बाद यह एक और बड़ा झटका होगा. उन्होंने नितिन गडकरी को भेजे गए पत्र में लिखा कि यह वृद्धि छोटे वाहन मालिकों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए बहुत ही असहनीय हो जाएगी. साथ ही एक्स पर एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया कि कोई भी फैसला लेने से पहले ट्रांसपोर्ट क्षेत्र के हितधारकों से संवाद किया जाए।

बीमा प्रीमियम बढ़ने से संभावित असरः

परिवहन लागत में वृद्धि: बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी का सीधा असर मालभाड़े पर पड़ेगा. आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई महंगी हो जाएगी. इससे आम जनता तक महंगाई की मार पहुंचेगी।

बीमा नवीनीकरण में कमी: छोटे ट्रक मालिक व सीमित संसाधन वाले वाहन ऑपरेटर बीमा का नवीनीकरण कराने से बचेंगे. इससे बिना बीमा के वाहन सड़कों पर बढ़ेंगे और कानूनी जटिलताएं भी बढ़ेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में असर: टीयर-2 व टीयर-3 शहरों के वाहन मालिक इस बढ़ोतरी से सबसे अधिक प्रभावित होंगे, जहां बीमा कवरेज पहले से ही बहुत कम है।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को झटका: सरकार लॉजिस्टिक लागत को जीडीपी के एकल अंकों में लाने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन यह वृद्धि उस उद्देश्य को कमजोर कर सकती है।

भ्रष्टाचार व उत्पीड़न की आशंका: जब बीमा महंगा हो जाएगा और लोग इससे बचेंगे तो चालान, जुर्माने व अधिकारियों के स्तर पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश बढ़ जाएगी।

परिवहन संगठनों की ये मांग:

हितधारकों से संवाद: कोई भी निर्णय लेने से पहले ट्रांसपोर्ट क्षेत्र से जुड़े संगठनों से चर्चा की जाए, जिससे जमीनी हकीकत को समझा जा सके।

पारदर्शी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं: IRDAI को पिछले 5 वर्षों में बीमा प्रीमियम व क्लेम भुगतान के आंकड़े साझा करने चाहिए।

छोटे ऑपरेटरों को राहत: एकल ट्रक मालिकों व ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए सब्सिडी या विशेष राहत योजना लागू की जाए।

वृद्धि चरणबद्ध व सीमित हो: अगर वृद्धि अनिवार्य है तो उसे 5–7% तक सीमित रखते हुए चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

बीमा कंपनियों का ऑडिट: बीमा कंपनियों के खर्च व क्लेम प्रक्रिया की जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराया जाए।

यह बीमा का नहीं, आजीविका का सवाल: ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेद्र कपूर ने अपने पत्र में लिखा है कि यह सिर्फ बीमा की दर बढ़ाने का मुद्दा नहीं है बल्कि देशभर में लाखों ड्राइवरों, हैल्परों व ट्रांसपोर्ट उद्यमियों की आजीविका का सवाल है. सरकार को इस प्रस्ताव पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से निवेदन किया है कि इस प्रस्ताव को तत्काल स्थगित किया जाए और एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें सभी हितधारकों की राय शामिल हो।

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