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प्रस्तावित एलिवेटेड रोड से संबंधित चल रहीं प्रक्रियाएं गैर क़ानूनी व जन विरोध।

देहरादून : मुख्य सचिव के नाम पर पत्र सौंपा कर विपक्षी दलों एवं जन संगठनों ने एलिवेटेड रोड परियोजना को ले कर चल रही कार्यवाही गैर क़ानूनी, जन विरोधी ठहराते हुए सवाल उठाया कि क्या चंद कंपनियों या नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए इस परियोजना के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है? पत्र द्वारा उन्होंने कहा कि मीडिया के अनुसार इस परियोजना पर सरकार 6200 करोड़ खर्च करने का योजना बना रही है जबकि इस साल का बजट के अनुसार पुरे राज्य में स्वास्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर मात्र 143 करोड़ का बजट है जो इससे 43 गुना कम है। ट्रैफिक सिग्नल को ठीक करने से, निजी स्कूलों को बसों को चलाने का अनिवार्य करने से, पार्किंग के लिए ठीक व्यवस्था बनाने से, और ऐसे अन्य छोटे कदमों को उठाने से देहरादून में यातायात स्थिति में काफी सुधार आ सकता है लेकिन इनके बजाय सरकार इस परियोजना पर इतने निधि नष्ट करना चाह रही है जो उत्तराखंड की जनता के साथ धोका है।

इस परियोजना से हज़ारों परिवार प्रभावित होने जा रहे हैं लेकिन इनकी सुरक्षा, रहने की व्यवस्था, और पुनर्वास के बारे में अभी तक सरकार खामोश है जिससे डर का माहौल बन गया है। समाज के सबसे वंचित और कमज़ोर वर्ग को ऐसी स्थिति में रहने को मज़बूर करना संविधानिक मूल्यों और उनके क़ानूनी हक़ों का हनन है। इसके अतिरिक्त सामाजिक समाधान निर्धारण अध्ययन (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) के लिए गठित समिति निष्पक्ष नहीं है और नियम के अनुसार नहीं बनाई गयी है। सारा प्रशासन इस नाजायज और विनाशकारी परियोजना के पक्ष में माहौल बनाने के प्रयास में लगा हुआ है जो जन विरोधी है।

पत्र और हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची सलग्न। क्योंकि प्रशासन कार्यवाही बहुत तेज रफ्तार से करने का प्रयास में दिखाए दे रहा है, पत्र को ईमेल द्वारा भेजा गया है और कल सचिवालय में भी सौंपा जाएगा।

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