देहरादून : 18वीं लोकसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए झटका हैं. उसने लोकसभा में अपना बहुमत खो दिया है जो उसे पिछले दो लोकसभा चुनावों 2014 और 2019 में मिला था। यह नरेंद्र मोदी के आसपास बनी अजेयता की छवि के लिए एक करारा झटका है, जिन्होंने इस चुनाव में 400 सीटें जीतने का दावा किया था। .
ये चुनाव विपक्षी दलों पर चौतरफा हमलों, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और धन-बल के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की पृष्ठभूमि में हुए थे। आज उत्तराखण्ड में आयोजित विभिन्न राजनैतिक दलों ,सामाजिक संगठनों ने सर्वसम्मति से कहा सत्तावादी हमलों के खिलाफ खड़े होने और संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों को बधाई देता है।
प्रस्ताव में कहा गया बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और लोकतंत्र और संविधान पर हमलों के मुद्दों को उठाकर एक विश्वसनीय प्रदर्शन किया है। वे मोदी और भाजपा द्वारा किये जा रहे सांप्रदायिक चुनाव प्रचार का काफी हद तक मुकाबला करने में सक्षम रहे।
प्रस्ताव में कहा गया यदि चुनाव आयोग ने समान अवसर सुनिश्चित किया होता तो परिणाम भाजपा और एनडीए के लिए अधिक प्रतिकूल होते। नरेंद्र मोदी की भड़काऊ सांप्रदायिक बयानबाजी को रोकने और आदर्श आचार संहिता को लागू करने में घोर विफलता आयोग की प्रतिष्ठा पर एक धब्बा है।
प्रस्ताव कहा गया है जनादेश के फैसले से संकेत मिलता है कि लोग लोकतंत्र, संविधान और अपनी आजीविका पर सभी हमलों का मुकाबला करने के लिऐ तैयार हैं।
उत्तराखण्ड राज्य में भाजपा की केन्द्र की मोदी एवं राज्य सरकार के जनविरोधी ,बेरोजगारी तथा महिला तथा आमजन विरोधी फैसलों का राजनैतिक दलों ,सामाजिक संगठनों ने अनवरत संघर्ष ने सत्ता के खिलाफ इन चुनावों माहौल बनाया है जो मतों के रूप में परिलक्षित हुऐ हैं ।प्रस्ताव में आमजन के संघर्ष को बधाई दी गई गई ।
बैठक सपा के एस एन सचान,अतुल शर्मा ,हेमा बोरा ,सिपिएम के राजेंद्र पुरोहित ,अनन्त आकाश ,सीआई टियू लेखराज ,एटक एस एस रजवार ,सर्वोदय मत्डल हरबीर कुशवाहा ,आयूपी नवनीत गुसाई ,परिषद चिन्तन सकलानी,एस एफ आई के हिमान्शु चौहान ,चेतना आन्दोलन शंकर गोपाल आदि ने विचार व्यक्त किये ।

