उत्तराखंडदेहरादून

संगठन ने किया पर्यटन विभाग की बुद्धि-शुद्धि हेतु हवन।

देहरादून : भैरव सेना संगठन से सम्बंधित दर्जनों कार्यकर्ता कुछ नेताओं तथा अधिकारीयों की मिलीभगत से अपने खासमखास को फायदा पहुंचाकर तीर्थ धाम एवम शक्तिपीठ-सिद्धपीठ को तीर्थाटन के बजाय पर्यटन में परिवर्तित करने को लेकर आक्रोशित होकर गांधी पार्क के मुख्य द्वार पर जोरदार नारेबाजी के साथ गढ़वाल संभाग सचिव गणेश जोशी के नेतृत्व में धमके तथा विरोध स्वरूप धर्मस्व एवम पर्यटन विभाग का बुद्धि-शुद्धि हवन कर अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी देहरादून के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित तहसीलदार सदर के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन प्रेषित किया जिसकी एक प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की गई।

भैरव सेना के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा की देवभूमि उत्तराखंड में सैकड़ों मोक्षधाम तथा शक्तिपीठ-सिद्धपीठ विद्यमान है। संपूर्ण विश्व के सनातन अनुसरणकर्ता मोक्ष के उद्देश्य से पवित्र तीर्थों की यात्रा पूर्ण आस्था, पवित्रता तथा सनातनी मान बिन्दुओं के आधार पर करते हैं और तीर्थ क्षेत्र के समस्त हकूकधारी एवम क्षेत्रीय निवासी तीर्थ यात्रियों का यथा सामर्थ्य आदर सत्कार सनातनी पवित्रता के अनुसार करते हैं तथा छः माह की यात्रा पर निर्भरता के साथ अपना जीवन यापन करते हैं। परन्तु विगत कुछ वर्षों में तीर्थधामों में विकृत मानसिकता के धर्म-निरपेक्ष व्यक्तियों की घुसपैठ व्यापारिक तथा पर्यटन के उद्देश्य से हो रही है। जिस कारण सनातन धर्म में आस्थावान न होने के चलते कई बार आपसी टकराव की स्थिति भी बन जाती है, और इसका सबसे प्रमुख कारण धर्मस्व तथा पर्यटन विभाग की मिलीभगत से तीर्थधाम में तीर्थाटन के बजाय पर्यटन को बढ़ावा देना है। निकट भविष्य में स्थिति और तनावपूर्ण होने के आसार हैं जिनमें से प्रमुख बिन्दु इस प्रकार से हैं।

श्री बद्रीनाथ मोक्षधाम क्षेत्रांतर्गत सीमांत गांव माणा में पौराणिक धार्मिक धरोहर सरस्वती नदी के उद्गम स्थल पर बने माँ सरस्वती मंदिर का महाराष्ट्र के धन्नासेठ द्वारा करोड़ों की लागत से निर्माण कर अवैध रूप से कब्जा करने के पश्चात गर्भ गृह में मां सरस्वती की मूर्ति के साथ अपने मृतक भाई-बहन, स्वर कोकिला लता मंगेशकर तथा महाराष्ट्र प्रान्त से सम्बंधित कुछ संतों की मूर्तियों को स्थापित कर मंदिर की समिति बना दी। जबकि सनातन धर्म में मृतकों की मूर्तियां अराध्य देवी-देवताओं के साथ विराजमान नहीं करते। जोकि सनातन धर्म में अक्षम्य अपराध है।

श्री केदारनाथ धाम में अनादि काल से पैदल यात्रा का विधान है, ज्यादा ही समस्या होती थी, तब तीर्थयात्री घोड़े-खच्चर, डंडी-कंडी तथा पालकी की व्यवस्था करते थे। जिससे की क्षेत्रीय हकूकधारीयों को भी रोजगार मिल जाता था। परन्तु एनजीटी हिमालयी क्षेत्र होने के पश्चात पहले तो हेलीकॉप्टर और अब थार गाड़ी का संचालन मंदिर परिसर तक व्यापारिक रूप से किया जा रहा है। जोकि धार्मिक यात्रा का अपमान है और सिर्फ विशिष्ट तथा अति विशिष्ट यात्रियों के लिये सुविधा देने हेतु किया जा रहा है। करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करना पर्यटन विभाग का यह कुकृत्य अक्षम्य अपराध की श्रेणी में है। जिस पर जांच कर उचित कार्यवाही होनी चाहिए।

तीर्थ यात्रा की अराध्य देवी शक्तिपीठ धारी देवी मंदिर परिसर में मोटर बोटिंग शुरू कर दी गई। पहले दूर से दूर से आस्थावान श्रद्धालुगण मां के दर्शनार्थ पारंपरिक रूप से आते थे। परन्तु अब मंदिर से अधिक मोटर बोटिंग के लिये अर्द्ध नग्न वस्त्रों में फूहड़ता के साथ पर्यटक आते हैं। जोकि सनातन आस्थाओं के साथ खिलवाड़ है। केन्द्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री ने इन सभी मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।
प्रदेश अध्यक्षा अनिता थापा ने कहा की यदि अति शीघ्र केदारनाथ धाम में क्षेत्रीय निवासियों के अधिकारों का हनन पर रोक तथा विशिष्ट यात्रियों के लिये थार गाड़ी का संचालन बंद नहीं हुआ तो बड़ा आन्दोलन की तैयारी केदारघाटी में की जायेगी। करण शर्मा ने कहा की धामों का अपमान अब देवभूमि बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

कार्यक्रम की रूपरेखात्मक कर्ता अनिल थपलियाल ने कहा की तीर्थधाम आस्था के केंद्र हैं नाकि हनिमून और रोमांच का केन्द्र अतः जल्द जल्द संबंधित विभाग अपनी गलती सुधारे अन्यथा प्रदेश व्यापी आन्दोलन के लिए तैयार रहें। बुद्धि शुद्धि यज्ञ तथा ज्ञापन प्रक्रिया में संगठन के प्राण प्रभारी अनिल थपलियाल, केंद्रीय सचिव संजय पंवार, चतुरानंद मलेथा, गीता बिष्ट, कमलेश, अनु राजपूत, हिमांशु भट्ट, करण शर्मा, राजकुमार, अमन, अजीत बिष्ट सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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