
देहरादून : उत्तरकाशी के सिल्यकारा टनल में फसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने तथा राज्य पहाड़ी क्षेत्रों में पहाड़ों के नीचे बनी रही सुंंरगों की समीक्षा तथा भीमकाय परियोजनाओं की समीक्षा की मांग को लेकर विभिन्न राजनैतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों ने देहरादून जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया ।
पिछले 15 दिनों से सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित टनल से बाहर निकालने की मांग करते हुऐ निवेदन करना चाहते है कि हमारे राज्य में हर बर्ष इस प्रकार की घटनाओं में निरन्तर बृध्दि के परिणामस्वरूप आये दिन मजदूरों एवं आमजन को अपनी जान गवानी पड़ती तथा जो मजदूर कार्य कर रहे हैं ,उनका जीवन हर समय जोखिम भरा है ।
2013 केदारनाथ की त्रासदी ,2020 जोशीमठ के टनल में 200 मजदूरों का जिन्दा दफन होने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण धटनाओं में रही हैं ,जिसका सबक हमारी सरकार नहीं लिया है ,निरन्तर त्रासदियों के बावजूद भी पहाड़ों व नदियों के साथ भीमकाय परियोजनाओं के नाम पर छेड़छाड़ के परिणामस्वरूप से निरन्तर दुर्घटनाऐं हो रही हैं।पहाड़ की पारस्थिति तन्त्र को मद्देनजर ही योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाऐ तथा इस कार्य में जिम्मेदारी एजेन्सियों को ही दिया जाऐ ।
इस दौरान सीपीआईएम के जिलासचिव राजेन्द्र पुरोहित, देहरादून सचिव अनन्त आकाश, सीपीआई के नेता अशोक शर्मा, जेडीएस के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह, आयूपी के अध्यक्ष नवनीत गुंसाई, एटक से एस एस रजवार, इफ्टा से हरिओम पाली, सीटू से लेखराज,भगवन्त पयार, रविन्द्र नौडियाल, पीपुल्स फोरम के संयोजक जयकृत कण्डवाल,पहाड़ी पार्टी के नेता महेंद्र नेगी,भारत सेवक समाज के मंजूर वेग, उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी परिषद के सुरेश कुमार आदि शामिल थे ।

