उत्तराखंडदेहरादून

शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र में ज्योतिबा फुले का महत्वपूर्ण योगदान : डॉ. राजेश पाल।

"सामाजिक क्रांति के अग्रदूत ज्योतिबा फुले की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।"

देहरादून : भारतीय दलित साहित्य अकादमी उत्तराखंड के द्वारा उत्तरांचल प्रेस क्लब देहरादून में “सामाजिक क्रांति के अग्रदूत ज्योतिबा फुले की जयंती पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध लेखक एवं प्रो. राजेश पाल ने कहा कि भारत में वंचित समाज एवं महिलाओं को शिक्षा से वंचित होते हुए देख ज्योतिबा फुले ने कई प्रयास किये। जिसके कारण समाज में शिक्षा की अलग जगाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कहा – शिक्षा के बिना मति गई, मति बिना नीति गई, नीति के बिना गति गई, गति बिना वित्त गया और वित्त के बिना वंचित समाज का पतन हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए राष्ट्रीय सामाजिक न्याय कृति मंच के अध्यक्ष नानक चंद ने कहा समाज की सामाजिक बुराइयों एवं भेदभाव के खिलाफ ज्योतिबा फुले जीवन भर संघर्ष करते रहे। उन्होंने महिला पुरुषों के समान अधिकार की बात की। वह विषमता वादी समाज को नष्ट करते हुए सभी के हित को ध्यान में रखने वाला सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर आधारित समाज बनाना चाहते थे।

प्रसिद्ध समाजसेवी सुशील सैनी ने कहा कि उनके समाज सुधार का लक्ष्य कोई एक धर्म एक जाति नहीं था उन्होंने सभी के लिए समान रूप से कानून बनाने के लिए कार्य किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान और पूर्व सरकारों ने कभी भी ज्योतिबा फुले को उनके कार्य एवं संघर्ष व लेखन के अनुरूप सम्मान नहीं दिया।

समाजसेवी आशा टम्टा ने कहा कि पुरुषों एवं महिलाओं के समान अधिकारों के पक्षधर फूले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षा देकर उन्हें भारत की पहली महिला शिक्षिका बनने का गौरव दिलाया। उन्होंने सती प्रथा, देवदासी प्रथा का विरोध करते हुए विधवाओं के पुनर्विवाह विवाह और अनाथ कन्याओं के लिए घर बनवाए थे।

एससी एसटी ओबीसी वैचारिक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीपचंद आर्य ने ज्योतिबा फुले के संपूर्ण जीवन की जानकारी दी और सभी से उनके जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेने की अपील की।

प्रदेश महासचिव चंद्रसेन ने कहा कि ज्योतिबा फुले सामाजिक और आर्थिक भ्रष्टाचार के साथ ही सांस्कृतिक भ्रष्टाचार को भी नष्ट करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आज बहुजन समाज उन्हें अपना आदर्श मानता है।

ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कल्याण सिंह ने कहा कि बाबा साहेब के माध्यम से पिछड़ा वर्ग को जो जागृति मिली है, उसके लिए वह सदा उनके ऋणी रहेंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी के पूर्वज एक ही थे, हमें एकजुट होकर विषमता वादी व्यवस्था से लड़ना होगा तभी जाकर हम सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर चलने वाले समाज का निर्माण कर सकेंगे।

बहुजन कवि महेंद्र सिंह कामा द्वारा ज्योतिबा फुले के जीवन दर्शन पर स्वरचित कविता प्रस्तुत की गई जिसे सभी लोगों द्वारा सराहा गया।

प्रदेश अध्यक्ष प्रो. जयपाल सिंह ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने 24 सितंबर 1873 को सत्यशोधक समाज की स्थापना की और उसके माध्यम से वर्ण व्यवस्था एवं मूर्ति पूजा का विरोध किया । उनकी चर्चित पुस्तक “गुलामगिरी” भी इसी वर्ष प्रकाशित हुई जिससे समाज में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढी। जिससे लोगों ने प्रेरणा ली और आज भी ले रहे हैं।

विचार गोष्ठी का शुभारंभ ज्योतिबा फुले के चित्र पर माल्यार्पण पुष्पांजलि एवं पांच मोमबत्ती जलाकर अतिथियों द्वारा किया गया उसके पश्चात सभी उपस्थित जनों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए और उनके बताएं मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।

विचार गोष्ठी का संचालन करते हुए उत्तराखंड एससी एसटी एम्पलाइज फैडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र सिंह बुटोइया ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने बताया था कि शिक्षा वह है जो सही को सही व गलत को गलत कहने व तर्क करने लायक बनाए। उन्होंने कहा था कि यह संसार तो सोए हुए लोगों की भीड़ है और सोए हुए लोग जागे हुए लोगों को बर्दाश्त नहीं करते हैं ।

इस अवसर पर राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक वृक्ष मित्र डॉ. त्रिलोक चंद सोनी, दि बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के राज्य कोषाध्यक्ष मनोहर लाल जिला अध्यक्ष जयपाल सिंह (बद्रीपुर वाले) भारतीय शूद्र संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतम सिंह कुलवंशी उत्तराखंड एससी एसटी एम्पलाइज फेडरेशन के महासचिव इंजी. सी. एल. भारती एससी एसटी शिक्षक एसोसिएशन के जिला मंत्री नरेश टम्टा कुलदीप सैनी सुरेश चंद्र बिरला राजाराम राजपाल सिंह विजय कुमार द्रोणी संतलाल पाटिल युवराज सिंह रमेश चंद्र हरिओम सिंह संजय कुमार इत्यादि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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