
देहरादून : लोकसभा चुनाव के बाद पहले बिजली दरों बढ़ोतरी तथा राज्य का बिजली विभाग अडाणी के हाथों देकर राज्य की जनता के साथ किये जा रहे छल फरेब की विभिन्न राजनैतिक दलों ने घोर निंदा कि है।
सिपिआई एम ,सीआईटीयू , राष्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी ,नेताजी संघर्ष समिति ने हाइकोर्ट के फैसले की आड़ में गरीबों को उजाड़ने की तैयारी का घोर विरोध किया है ।जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में इन राजनैतिक दलों /संगठनों ने कहा है कि आपकी सरकार एवं प्रशासन इस आड़ में गरीबों को निशाना बनाकर बड़े बड़े अतिक्रमणकारियों को बचा रही है ,यही नहीं जहाँ गरीब लोग बसे वहां की भूमि बडी़ – बड़ी नीजि कम्पनियों को देने की तैयारी चल रही है।
राजनैतिक दलों/संगठनों ने कहा है कि सरकार की नजर कैन्टबोर्ड की भूमि पर भी है, इसलिए सरकार सुविधाएं देने की आड़ में इसे नगरनिगम में मिलाना चाहती है ,जिसका चारों तरफ विरोध हो रहा है । संगठनों ने कहा है कि सरकारी प्रतिनिधि व भाजपा पार्टी के नेता इस जनविरोधी फैसलों को सही ठहराने में लगे हैं जबकि वे स्वयं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बैठे हैं ।संगठनों ने कहा है कि सर्वविदित है कि आपकी लगभग सभी कार्य बड़े घरानों के हितों की पूर्ति करते रहे हैं इसलिए हम इस ज्ञापन के माध्यम से आपसे मांग करते हैं कि हैं कि अतिक्रमण हटाने की आड़ में गरीबों को उजाड़ने की कार्यवाही अविलम्ब रोक लगाई जाऐ तथा उक्त जनविरोधी फैसले को वापस लें ।
ज्ञापन देने वालों मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के देहरादून सचिव अनन्त आकाश ,सीआईटी यू के जिला महामंत्री लेखराज ,राष्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी अध्यक्ष नवनीत गुसांई ,नेताजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल ,भीम आर्मी के अध्यक्ष आजम खान ,एटक के नेता एस एस रजवार आदि शामिल थे ।जिलाधिकारी की ओर से ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह ने लिया तथा उन्होंने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया ।


