मोदी कैबिनेट ने 62 साल पुराने बैंक को बेचने की दी मंजूरी।
कौन बनेगा IDBI बैंक का नया मालिक।

नई दिल्ली : 62 साल पुराने भारतीय बैंक IDBI बैंक में सरकारी हिस्सेदारी बेचने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। इस मंजूरी के तहत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी कुल 60.72% हिस्सेदारी ‘कनाडा इंक’ को बेचेंगे। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स कनाडा इंक की पैरेंट कंपनी है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा, “हमें ऐसे संगठनों की जरूरत है जो उद्यमियों के लिए ग्रोथ कैपिटल की जरूरतें पूरी कर सकें।”
IDBI बैंक की हिस्सेदारी को कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपये में बेचा जाएगा। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को भारतीय-कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा का समर्थन हासिल है।
प्रेम वत्सा का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। और उन्होंने IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और इसके बाद वह 1972 में कनाडा चले गए और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो से MBA किया। उन्होंने 1985 में टोरंटो में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की स्थापना की। और आज इस कंपनी का मार्केट कैप लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपये है।
आपको बता दें कि प्रेम वत्सा भारत में जन्मे कनाडाई अरबपति निवेशक, व्यवसायी और समाजसेवी हैं, जो फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के चेयरमैन और CEO के तौर पर काम करते हैं। प्रेम वत्सा की अनुमानित नेट वर्थ $2.5 बिलियन ( 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) है ।
बैंक में 60.72% हिस्सेदारी की यह बिक्री भारत के फाइनेंशियल सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) होगा। यह पूरी प्रक्रिया मार्च 2027 तक पूरी हो जाएगी।
फेयरफैक्स ने जो शेयर खरीद समझौता किया है, वह डील पूरी होने के बाद तीन साल तक लागू रहेगा। इसका मतलब है कि IDBI बैंक के नए प्रमोटर के तौर पर फेयरफैक्स को उस समय तक बैंक का नाम बनाए रखना होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “यह विनिवेश (disinvestment) नहीं, बल्कि पुनर्गठन (restructuring) है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार IDBI बैंक में निवेश बनाए रखेगी।”



