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राजनीतिक दलों को विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले लेनी होगी अनुमति : चुनाव आयोग।

नई दिल्ली : बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों और कई राज्यों में होने वाले उपचुनावों से पहले निर्वाचन आयोग (ECI) ने राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर अहम कदम उठाया है. आयोग ने मंगलवार को कहा कि राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को प्रकाशन से पहले सोशल मीडिया सहित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापनों के प्री-सर्टिफिकेशन के लिए मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से आवेदन करना होगा।

चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से नामांकन भरते समय अपने सर्टिफिकेशन सोशल मीडिया अकाउंट भी साझा करने को कहा है. चुनाव आयोग ने यह निर्णय समान अवसर सुनिश्चित करने, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के उद्देश्य से लिया है।

गौरतलब है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के लिए चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होने हैं. वहीं, छह राज्यों और जम्मू-कश्मीर की आठ सीटों पर विधानसभा उपचुनाव 11 नवंबर को होंगे. वोटिंग की गिनती 14 नवंबर को होगी।

चुनाव आयोग ने बताया कि उसने 9 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी पंजीकृत/राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को प्रकाशन से पहले सोशल मीडिया सहित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व-प्रमाणन के लिए एमसीएमसी में आवेदन करना अनिवार्य कर दिया है।

निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व-प्रमाणन के लिए जिला और राज्य स्तर पर MCMC का गठन किया गया है. चुनाव आयोग ने कहा, “संबंधित एमसीएमसी से पूर्व-प्रमाणन के बिना राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों द्वारा सोशल मीडिया वेबसाइटों सहित किसी भी इंटरनेट-आधारित मीडिया/वेबसाइट पर कोई भी राजनीतिक विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।

MCMC मीडिया में पेड न्यूज के संदिग्ध मामलों पर भी कड़ी नजर रखेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे. चुनावी परिदृश्य में सोशल मीडिया की बढ़ती पैठ को देखते हुए, चुनाव आयोग ने कहा कि उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय अपने प्रामाणिक सोशल मीडिया अकाउंट का विवरण साझा करने का भी निर्देश दिया गया है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर सोशल मीडिया वेबसाइटों सहित इंटरनेट के माध्यम से प्रचार पर हुए खर्च का विवरण भी चुनाव आयोग को प्रस्तुत करना होगा।

चुनाव आयोग ने कहा कि इस तरह के खर्चों में अन्य बातों के अलावा, इंटरनेट कंपनियों और वेबसाइटों को विज्ञापन देने के लिए किए गए भुगतान, कंटेंट डेवलपनेंट पर अभियान संबंधी खर्च और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को बनाए रखने के लिए किए गए परिचालन व्यय शामिल होंगे।

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