
नई दिल्ली : ऑपेरशन सिंदूर के मुद्दे पर INDIA गठबंधन से अलग-थलग होने का पहले ही संकेत दे चुकी आम आदमी पार्टी अब पूरी तरह इंडिया गठबंधन से अलग हो गई है. शनिवार को इंडिया गठबंधन की होने वाली अहम बैठक में आम आदमी पार्टी भाग नहीं लेगी. इस बैठक में आप पार्टी का कोई भी नेता शामिल नहीं होगा. आप औपचारिक रूप से जून 2023 में गठित इंडिया गठबंधन से बाहर हो गई है।
ज्ञात हो कि इससे पहले ऑपेरशन सिंदूर के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले संसद के विशेष सत्र की मांग करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को लिखे इंडिया गठबंधन के संयुक्त पत्र से खुद को अलग कर लिया था. सांसद संजय सिंह ने इसका मुख्य कारण कांग्रेस नेतृत्व को बताया था. अब 19 जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर इंडिया गठबंधन की बैठक होने वाली है।
इस बैठक में आम आदमी पार्टी के अलावे तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेता अन्य व्यस्तता के चलते शामिल नहीं होंगे. टीएमसी नेता 21 जुलाई को होने वाले शहीद दिवस कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त होने की वजह से इस बैठक में शामिल नहीं होंगे, लेकिन पार्टी गठबंधन के साथ है।
विपक्षी सांसद बनाएंगे अपनी रणनीति: मानसून सत्र से ठीक पहले विपक्षी सांसद इस बैठक में अपनी रणनीति बनाएंगे. इससे पहले इंडिया गठबंधन की बैठक लोकसभा चुनाव के बाद 1 जून 2024 को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर ही हुई थी. इसके बाद से कोई बैठक नहीं हुई है।
हालांकि, गत जून में ऑपेरशन सिंदूर के बाद INDIA गठबंधन में शामिल पार्टी के नेता संसद में मिले थे. जब इंडिया गठबंधन के सांसदों ने एक साझा खत लिखकर ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर पर अमेरिका की मध्यस्थता को लेकर विशेष संसद सत्र बुलाने की मांग की थी. तब भी आम आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को अलग पत्र लिखा था।
INDIA गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए था: INDIA गठबंधन की शनिवार को होने वाली बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP नेता संजय सिंह ने कहा कि इंडिया गठबंधन का गठन विशेष रूप से 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए किया गया था. गठबंधन की वजह से विपक्षी दलों को 240 सीटें मिलीं, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वर्तमान में जनता के सामने बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे के विरोधी बनने का नाटक करते हैं, लेकिन असल में दोनों ने आपस में गुप्त गठबंधन कर रखा है. ये गठबंधन न वैचारिक है, न सैद्धांतिक. ये एक भ्रष्ट और अवसरवादी समझौता है, जिसमें सत्ता, भ्रष्टाचार और राजनीतिक सौदेबाज़ी सबसे ऊपर है. कांग्रेस का हर कदम बीजेपी को लाभ देने वाला होता है. और बदले में बीजेपी सरकार गांधी परिवार और कांग्रेस के भ्रष्ट नेताओं को जेल जाने से बचाती है।

