उत्तराखंडदेहरादून

भैरव सेना ने किया मसाल विरोध प्रदर्शन।

देहरादून : बद्रीनाथ धाम के निकट सीमांत गांव माणा में सरस्वती मंदिर के गर्भगृह में अराध्य देवी सरस्वती के साथ महाराष्ट्र के धन्नासेठ विश्वनाथ कराड के मृतक परिजनों की मूर्ति को लेकर आक्रोशित भैरव सेना के सदस्यों ने केंद्रीय महिला मोर्चा अध्यक्ष अनिता थापा के नेतृत्व में मशाल जुलूस निकालकर जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन स्वरूप विरोध दर्ज किया।

केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री के अनुसार 2021 में कोरोना काल के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का फायदा उठाते हुए महाराष्ट्र के शिक्षा व्यवसायी धन्नासेठ विश्वनाथ कराड ने सीमांत गांव माणा के भीमपुल के निकट कथित तौर पर 29 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार किए पौराणिक सरस्वती मंदिर का उद्घाटन उत्तराखंड राज्य के कद्दावर रसूखदार राजनितिक व्यक्तियों के हाथों से करवाया था।

मंदिर उद्घाटन के पश्चात जब श्रद्धालुगण दर्शनार्थ मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करने पहुंचे तो भक्तगणों को ज्ञात हुआ कि शिक्षा की देवी मां सरस्वती के अगल-बगल मृतक मानवों की मूर्तियां भी स्थापित की गई है। जो की मंदिर जीर्णोद्धार करवाने वाले विश्वनाथ कराड के परिवार से तथा आस्था से संबंधित थे। और मृतक मूर्तियां मंदिर के गर्भगृह में स्थापित करवाने में माणा गांव के प्रधान पीतांबर मोल्फा की मुख्य भूमिका रही। मामला संज्ञान में आने के पश्चात 2022 से 4 वर्ष के दौरान संगठन द्वारा विभिन्न जनपद स्तर पर 13 ज्ञापन प्रेषण, 9 पुतला दहन, 6 जनजागरण रैली, 5 प्रदर्शन, 7 वार्ता, 2 माणा गांव कूच तथा 1 सामूहिक हिरासत जनपद चमोली के कर्णप्रयाग थाने में दी।

इसके पश्चात प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेकर बद्रीनाथ पुलिस के द्वारा जांच करवाई तथा गांव और विश्वनाथ कराड से बातचीत कर 2024 कपाट बंद होने से पूर्व मंदिर प्रांगण से मूर्तियों को हटाने का लिखित आश्वासन दिया परंतु 2025 की तीर्थ यात्रा प्रारंभ होने के दो माह पश्चात भी सरस्वती मंदिर के गर्भ गृह से मृतकों की मूर्तियां ना निकलने से आक्रोशित संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा पंडित दीनदयाल पार्क से ऐतिहासिक गांधी पार्क तक मशाल जुलूस के रूप में आक्रोश प्रदर्शन किया गया।

संगठन की प्रदेश अध्यक्ष काजल चौहान ने कहा कि पितृ श्राद्ध के दौरान संगठन द्वारा अब स्वयं से मूर्तियों को मोक्ष धाम भेजने के लिए माणा गांव का कुच किया जाएगा। जिसके लिए संगठन चार सालों की संवैधानिक लड़ाई के पश्चात आक्रोश के अंतर्गत होने वाली कानूनी प्रक्रिया से निपटने के लिए भी तैयार है।

भैरव सेना के मशाल जुलूस को राज्य के विभिन्न संगठनों का भारी समर्थन मिला। जिनमें से उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, गौरव सेनानी संगठन, अखिल भारतीय हिंदू रक्षा वाहिनी, प्रतिष्ठा सेवा समिति, वैदिक मिशन, सहित विभिन्न संगठनों का समर्थन मिला।

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