
देहरादून : मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर साम्प्रदायिक एवं अभद्र टिप्पणी पर गहरा रोष व्यक्त करते हुये ,गांधी पार्क के पास उनका पुतला दहन कर भाजपा की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी कि और कहा है कि भाजपा एक ओर देशभर में तिरंगा यात्रा निकालकर ऑपरेशन सिन्दूर का जश्न मना रहें हैं , जिसका नेतृत्व कर्नल सोफिया एवं विंग कमाण्डर ब्योमिका सिंह ने कर देश का गौरव बढ़ाया ,ठीक सरकार के मन्त्रि कर्नल सोफिया पर टिप्पणी करना सोचि समझी नीति का हिस्सा है ।आज बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जिला कार्यालय में एकत्रित होकर जलूस कि शक्ल में राजपुर रोड़ से होता हुआ गांधी पार्क में पहुंचकर अजय शाह का पुतला दहन किया ।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा है कि यदि मध्य प्रदेश का हाईकोर्ट उक्त साम्प्रदायिक टिप्पणी पर हस्तक्षेप नहीं करता तो मन्त्रि के खिलाफ एफ आई आर दर्ज नहीं होती अब प्रदेश सरकार को चाहिए कि उन्हें गिरफ्तार करें तथा मध्यप्रदेश सरकार उन्हें मन्त्रिपद से बर्खास्त करे ।वक्ताओं ने इस सन्दर्भ में प्रधानमंत्री मोदी तथा रक्षा मन्त्रि ,गृहमंत्री कि चुप्पी पर खेद व्यक्त किया है ।
वक्ताओं ने कहा है कि FIR दर्ज करने का आदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) को मंत्री विजय शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196(1)(बी), और 197(1)(सी) के तहत FIR दर्ज करने का स्पष्ट निर्देश दिये हैं,जो कि देशद्रोह, सार्वजनिक शांतिभंग, और समुदायों के बीच द्वेष फैलाने वाली धाराओं से सम्बन्धित हैं ।वक्ताओं ने कहा है कि कोर्ट ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR की सामग्री से असंतोष जताया और यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की निगरानी करने का फैसला किया कि प्रक्रिया निष्पक्ष हो ।
वक्ताओं ने कहा है कि न्यायालय ने कहा कि FIR में मंत्री के कृत्यों का स्पष्ट विवरण नहीं था, जिससे इसे चुनौती दिए जाने पर रद्द किया जा सकता था।
वक्ताओं ने कहा है कि हाईकोर्ट ने विजय शाह की टिप्पणी को “अपमानजनक”, “खतरनाक”, और “गटर की भाषा” बताया। न्यायाधीशों ने कहा कि यह टिप्पणी न केवल कर्नल कुरैशी के सम्मान के खिलाफ थी, बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्रीय एकता को भी नुकसान पहुंचाती है। वक्ताओं ने कहा है कि कोर्ट ने निर्देश दिया कि 14 मई के अपने पूरे आदेश को FIR के पैरा 12 के भाग के रूप में पढ़ा जाए, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे और FIR को आसानी से रद्द न किया जा सके ।
वक्ताओं ने कहा है कि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि उसके आदेश का पालन नहीं किया गया, तो पुलिस अधिकारियों को अवमानना का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा, कोर्ट ने FIR दर्ज करने के लिए केवल 4 घंटे का समय दिया, जिसे पुलिस ने बुधवार रात 11:30 बजे तक पूरा किया।
वक्ताओं ने कहा है कि इन निर्देशों के पीछे हाईकोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की आपत्तिजनक टिप्पणी पर कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष हो। साथ ही, न्यायालय ने सेना के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने पर जोर दिया।
वक्ताओं ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत किया है ।
इस अवसर पार्टी राज्य सचिव राजेंद्र पुरोहित ,जिलासचिव शिवप्रसाद देवली ,देहरादून सचिव अनन्त आकाश सचिव मण्डल के लेखराज ,कमरूद्दीन ,भगवन्त पयाल ,सुरेन्द्र सिंह सजवाण आदि ने विचार व्यक्त किये ।
इस अवसर पर विजय भट्ट ,शम्भू प्रसाद ममगाई ,दमयंती नेगी ,रविन्द्र नौडियाल ,अभिषेक भण्डारी ,किरण यादव ,विनोद कुमार ,अर्जुन रावत ,राजेन्द्र शर्मा ,यू एन बलूनी ,प्रदीप कुमार ,एन एस पंवार ,इन्देश नौटियाल ,कमलेश खन्तवाल ,कनिका ,सोनू कुमार ,गुरू प्रसाद ,आनन्द मणि डंगवाल ,योगेन्द्र नेगी ,शाबाज,नितिन आदि बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे ।

