
देहरादून : भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम सर्वपल्ली डाक्टर राधाकृष्णन द्वारा सन् 62 के भारत चीन के युद्ध में अदम्य साहस के लिऐ तबके सर्वोच्च सम्मान से पुरूस्कार से नवाजे 93 बर्षीय सुबेदार बागसिंह अपने मुआवजे के लिऐ मेयर, जिलाधिकारी तथा क्षेत्रीय विधायक खजानदास का कई चकर काट चुके हैं किन्तु निराशा हि उनके हाथ लगी है।
यही हालात कई प्रभावितो का जो जनप्रतिनिधियों का चक्कर काट रहे है, बस्ती बचाओ आन्दोलन को अनेक प्रभावितों से सम्पर्क कर पता चला कि सुबेदार बागसिंह कि तरह मदद के लिऐ दर दर भटक रहे हैं तथा जनप्रतिनिधियों का व्यवहार उनके प्रति न केवल असहयोगात्मक है बल्कि एक विधायक ने प्रार्थनापत्र को प्रभावितों के मुंह पर दे मारा यही हाल कई पार्षदों का भी है ।
सुबेदार बाग सिंह राजपूताना राइफल में देश में बेहतरीन सेवा के लिए जाने जाते रहे है, शौर्य चक्र के बाद उन्हें अशोक चक्र से नमाजे गये वे भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून में मुख्य प्रशिक्षिक रहे बागसिंह जिनके नेतृत्व में सैकड़ों कैडिटों ने प्रशिक्षिण प्राप्त सैना में उच्च पदस्थ हुऐ ।
सेवानिवृति के बाद बर्ष 1978 में वै देहरादून में बस गये तथा कांवली रोड़ शिवाजी मार्ग में रहने लगे 11 अगस्त 025 कैअतिबृष्टि के परिणामस्वरूप बिन्दाल में भारी बाढ़ तथा कांवली पुल में जलभराव के परिणामस्वरूप उनके दो मंजिला मकान बाढ़ की चपेट इस घटना में उनकी लगभग 7लाख का नुकसान हुआ आज तक प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों ने उनकी सुद तक नहीं ली जब शौर्य चक्र बिजैता कै साथ ऐसा व्यवहार है तो आमजन का क्या हाल होगा।

