उत्तराखंडदेहरादून

जिलाधिकारी कार्यालय पर बस्ती बचाओ आंदोलन का होगा जबरदस्त प्रदर्शन।

देहरादून : मुख्य मुद्दे एवं आरोप :

1. **अन्यायपूर्ण बेदखली:**

– सरकार द्वारा **गरीब बस्तियों** को “अवैध” घोषित कर बेदखल करने का प्रयास, जबकि अमीरों की संपत्तियाँ व सरकारी भवन बचाए जा रहे हैं।

– 7 मई 2025 के अधिसूचना में केवल गरीब बस्तियों को लक्षित किया गया।

 

2. **वादाखिलाफी:**

– मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनावों में “मालिकाना हक” देने और “गरीब बस्तियों को न बेदखल करने” का वादा किया, लेकिन अब उनकी सरकार हाईकोर्ट/एनजीटी के आदेशों का दुरुपयोग कर बेदखली की तैयारी कर रही है।

3. **पर्यावरणीय खतरा:**

– **रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड** परियोजना नदी के प्राकृतिक बहाव को अवरुद्ध करेगी, जिससे पारिस्थितिकी को नुकसान होगा। सरकार “नदी संरक्षण” का बहाना बना रही है।

4. **गैरकानूनी विस्थापन:**

– बिना पुनर्वास योजना और मुआवजे के विस्थापन किया जा रहा है, जो सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

आंदोलन की मुख्य मांगें :

1. **परियोजना रद्द करो:**

– गैरजरूरी एलिवेटेड रोड के बजाय **सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क** (सड़कें, बस सेवा) मजबूत करें, जो नदी क्षेत्र को नुकसान न पहुँचाए।

2. **बस्तियों का सुधार:**

– “स्लम रिहैबिलिटेशन एक्शन प्लान” लागू कर बस्तियों में पानी, बिजली, सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।

3. **नोटिस वापस लो व स्वच्छता अभियान:**

– नगर निगम द्वारा भेजे गए नोटिस वापस लिए जाएँ।

– बस्तियों में सफाई, फॉगिंग, ब्लीचिंग का काम किया जाए और नशाखोरी रोकी जाए।

प्रदर्शन का विवरण:

– **तारीख:** 9 जुलाई 2025

– **स्थान:** देहरादून जिला मुख्यालय

– **उद्देश्य:** जिलाधिकारी, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांगों को रखना।

संयोजक :अनन्त आकाश (संपर्क: 9084774732, 8433407055)

पृष्ठभूमि:

– फरवरी 2025 से बस्तियों के खिलाफ उत्पीड़न और एलिवेटेड रोड परियोजना का विरोध जारी है।

– आंदोलन के दबाव के कारण सरकार अब मुआवजे और पुनर्वास की बात करने लगी है, जबकि पहले बस्तियों को “अवैध” बताया जा रहा था।

**अगले कदम:**

– सरकार से मांग है कि वह **बस्तियों के मालिकाना हक** को मान्यता दे, एलिवेटेड रोड जैसी विनाशकारी परियोजनाएँ रद्द करे, और गरीबों के अधिकारों का संरक्षण करे।

– यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज होगा।

नारा:** “गरीबों का आवास अधिकार – हमारा संवैधानिक अधिकार!”

**भविष्य की रणनीति:** कानूनी लड़ाई, जनजागरूकता अभियान और बहुस्तरीय प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रखना।

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