उत्तराखंडदेहरादून

हल्द्वानी हिंसा में दोषियों की नागरिकता रद्द करने की मांग।

देहरादून : 8 फरवरी को हल्द्वानी में अवेध कब्जा हटाने गये पुलिस और नगर निगम की टीम पर घात लगाकर हमला करने वालों के विरुद्ध राजद्रोह के अन्तर्गत एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) की धाराएं लगाकर कड़ी से कड़ी सज़ा के साथ भारतीय नागरिकता भंग करने की मांग को लेकर भैरव सेना संगठन ने प्रदेश अध्यक्षा अनिता थापा के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं सहित प्रदर्शन कर जोरदार नारेबाजी के साथ जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम मांगपत्र सौंपा।

प्रदर्शन में पहुंचे संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा की देवभूमि उत्तराखंड कोई शरण स्थली नहीं, जहां पर जिसका मन आए और अवैध कब्जे कर के बस जाए। एक रिपोर्ट के अनुसार पलायन हो रहे उत्तराखंड में 30% से अधिक की आबादी 10 वर्षों में तेजी से बड़ी है। वन निगम तथा नदियों के किनारे सरकारी भूमियों में जबरन कब्जा कर अवैध धार्मिक स्थल बनकर रातों रात खड़े हो रहे हैं। जिनका ध्वस्तिकरण करने के लिए प्रशासन को एड़ी चोटी का प्रयास करना पड़ता है। हल्द्वानी में हुई ताजी घटना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जहां पर राज्य ओर देश की आंतरिक सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों पर हमले से भी अवैध कब्जाधारी बाज नहीं आते।

जिला अध्यक्ष गणेश जोशी तथा सुजाता रावत ने आक्रोशित होकर कहा की पुलिस कर्मियों पर हमला करने वालों की जांच कर कर, उन पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर भारतीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्यवाही हो तथा भारतीय नागरिकता रद्द करने की भी कार्रवाई की जाए। ताकि आने वाले समय में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति करने का साहस किसी के अन्दर ना हो पाए। देश का सांप्रदायिक माहौल और एकता बनाए रखने के लिए शांति भंग करने वालों को बिल्कुल भी ना बक्शा जाए। क्योंकि पुलिस और सेना पर हमला करना देशद्रोह से कम नहीं।

ज्ञापन कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपरोक्त वक्ताओं सहित काजल चौहान, करण शर्मा, अनुष्का बर्तवाल अनु राजपूत, प्रेम शंकर, हेमंत सकलानी, प्रवीण कालरा, राजकुमार आरजू सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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