
देहरादून : जनता की व्यापक असहमति और विरोध के बावजूद एलिवेटेड रोड परियोजना को आगे बढ़ाना, हजारों परिवारों को बेघर करने वाला दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है। इस परियोजना के स्थान पर देहरादून की मौजूदा सड़कों के व्यापक सुधार तथा सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
हम, बस्ती बचाओ आन्दोलन की ओर से मांग करते हैं कि इस जनविरोधी एलिवेटेड रोड परियोजना को तुरन्त प्रभाव से निरस्त किया जाए। हमारी मांग निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित है:-
1. देहरादून के प्रभावित परिवार, प्रतिष्ठित पर्यावरणविद्, एवं प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक संगठन इस परियोजना को जनविरोधी घोषित कर चुके हैं।
2. यह परियोजना न केवल सर्वेक्षण में चिन्हित लगभग 2800 परिवारों को बल्कि उससे कई गुना अधिक परिवारों को अप्रत्यक्ष रूप से विस्थापित करेगी, जिससे उनके आवास व उनकी आजीविका पर संकट आएगा।
3. परियोजना के कारण हजारों पेड़ कटेंगे और रिस्पना-बिंदाल नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होगा। इससे पूर्वानुमानित क्षति से कहीं अधिक विनाशकारी बाढ़ जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
4. रिस्पना-बिंदाल के किनारे खाली कराई जा रही जमीन के बाहरी कंपनियों को सौंपे जाने की आशंका है, जो नितांत अन्यायपूर्ण है। इस परियोजना में केवल गरीब बस्तियों को लक्षित किया गया है, जबकि प्रभावशाली व्यक्तियों और सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों को नजरअन्दाज किया जा रहा है।
5. यातायात सुधार के नाम पर बन रहा यह एलिवेटेड रोड जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों को बेघर करने का माध्यम बनेगा। जिस प्रकार ‘स्मार्ट सिटी’ के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी देहरादून स्मार्ट नहीं बन पाया, बल्कि उस बहाने हजारों पेड़ काटे गए, जिससे शहर का तापमान बढ़ा और अतिवृष्टि जैसी समस्याएँ पैदा हुईं, वैसा ही हश्र इस परियोजना का भी होगा।
6. इस परियोजना के तहत बड़ी संख्या में वृक्षों का कटना देहरादून के संवेदनशील पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध होगा।
7. यह सड़क बड़े पैमाने पर विस्थापन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को भी समाप्त कर देगी। आगन्तुक सीधे मसूरी एवं धनोल्टी की ओर चले जाऐंगे और बिना रुके लौट जाएंगे। ठीक वैसे ही जैसे उत्तराखंड में ऑल वेदर रोड के कारण चारधाम यात्रा का लाभ स्थानीय समुदाय को नहीं मिल पा रहा है।
8. जनसुनवाई के दौरान बस्तीवासियों ने सर्वसम्मति से इस परियोजना का विरोध किया और लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद, गठित समिति ने पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर जनता की आवाज को अनसुना कर दिया।
9. जिलाधिकारी देहरादून द्वारा भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत जारी सार्वजनिक सूचना (विज्ञप्ति संख्या: 253/8-वि0 भू0 अ0/2026/ रिस्पना एलिवेटेड रोड 4542/ दिनांक 19 जनवरी 2026) अत्यंत चिंताजनक एवं एकतरफा है। इस सूचना में केवल 376 प्रभावितों को मुआवजे का प्रावधान दिखाया गया है, जबकि वास्तविक कब्जाधारियों एवं बड़ी संख्या में विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का कोई ठोस आश्वासन नहीं है। परिणामस्वरूप, ये परिवार पिछले एक वर्ष से अधिक समय से भय एवं असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
10. यह परियोजना समाज के सबसे कमजोर वर्गों को लक्षित करती है। इसके दायरे में आने वाले अधिकांश परिवार अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक, अत्यन्त गरीब, विधवाऐं और दिव्यांगजन हैं, जो अत्यधिक तंगहाली एवं विपरीत परिस्थितियों के बावजूद समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे परिवारों को बेघर करना न केवल मानवीय दृष्टि से संवेदनहीनता होगी, बल्कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के भी विरुद्ध होगा।
आशा है कि आप उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर गम्भीरता से विचार करते हुए जनहित में शीघ्र एवं प्रभावी कार्यवाही करेंगे।



