
देहरादून : आज मज़दूर संगठनों की और से एक सृष्ट मंडल उप नगर आयुक्त से मिल कर शहर के मलिन बस्तियों में हो रही बेदखली प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाये । संगठनों ने आरोप लगाया कि जब न्यायलय के आदेश सारे अतिक्रमण और प्रदूषण के स्रोतों को ले कर है, और जब बड़े होटल, रिसोर्ट, सरकारी विभाग और निजी इमारत नदियों में बसे हैं, सिर्फ मज़दूर बस्तियों को क्यों उजाड़ा जा रहा है? इसके अतिरिक्त जनता को सिर्फ सात दिन का नोटिस देना; उनको सुनवाई के लिए मौका न देना; और उनको तीस दिन हटने के लिए समय नहीं देना, उन्होंने इन सब कदमों को गैर क़ानूनी ठहराया। उन्होंने नगर निगम से निवेदन किया कि जब नियमितीकरण एवं घर देना सरकार का क़ानूनी एवं संवैधानिक फ़र्ज़ है, तो उनको कोर्ट के सामने पूरी क़ानूनी तस्वीर को रखना चाहिए, जिसके अंतर्गत 2016 का मलिन बस्ती कानून के प्रावधान भी हैं और मज़दूरों का आश्रय का अधिकार भी। उप नगर आयुक्त ने कहा कि इन बातों पर विभाग विचार करेंगे और कोशिश करेंगे कि किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
AITUC के राज्य उप अध्यक्ष समर भंडारी एवं राज्य सचिव अशोक शर्मा; CITU के राज्य सचिव लेखराज; और चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल सृष्ट मंडल में शामिल रहे।



