
देहरादून : कोतवाली विकासनगर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय संरक्षित पशुओं के तस्कर गिरोह लाडवा गैंग के 03 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गैंग के लोगों के कब्जे से एक जीवित सांप, संरक्षित प्रजाति (Schedule-I Part-C, WLP Act 1972) बरामद किया गया. बरामद संरक्षित प्रजाति के सांप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 01 करोड़ रुपये है. गिरोह के सदस्यों द्वारा तांत्रिक क्रियाओं के लिए भारी कीमत पर बेचने के उद्देश्य से इस सांप की तस्करी की जा रही तस्करी थी।
देहरादून में संरक्षित प्रजाति का दुर्लभ सांप बरामद: एसएसपी देहरादून अजय सिंह को तांत्रिक क्रियाओं के लिए प्रयोग में आने वाले दुर्लभ प्रजाति के सांप को बेचने संबंधी सूचना मिली थी. सूचना देने वाले ने बताया कि हरियाणा के एक वन्य जीव तस्कर गिरोह “लाडवा गैंग’ के 03 सदस्य नहर रोड स्थित कूड़ा घाटी मार्ग विकासनगर पर एक बिना नंबर की सफेद स्विफ्ट कार में सवार हैं. उनके पास दो मुंहा सांप है. ये सांप अंतरराष्ट्रीय संरक्षित पशु के अंतर्गत आता है।
वन्य जीव तस्करों से 1 करोड़ का सांप बरामद: लाडवा गैंग के वन्य जीव तस्कर यह सांप हरियाणा से लाए थे. इसको देहरादून में ऊंचे दाम पर तांत्रिक क्रियाओं हेतु बेचने वाले थे. संरक्षित प्रजाति का ये दुर्लभ सांप बहुत ऊंचे दामों पर बिकता है. पुलिस के अनुसार इसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत लगभग 1 करोड़ रुपए है. खुद को लाडवा गैंग ने भी पुलिस को यही बताया. दुर्लभ दो मुंहे सांप की बरामदगी के बाद मौके पर वन विभाग की टीम को बुलाया गया. जिनके द्वारा बरामद सांप की पहचान के रूप में की गई।
लाल रेत बोआ है संरक्षित प्रजाति का सांप: वन कर्मियों ने बताया कि यह प्रजाति वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 यथा संसोधित 2022 की अनुसूची-1 के पार्ट सी सरीसर्प के क्रम संख्या 01 पर है और अधिनियम अंतर्गत संरक्षित है।
वन्य जीव तस्करों के खिलाफ मुकदमा दर्ज: देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया है कि सांप का शिकार, व्यापार, संग्रहण ओर परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है. पकड़े गये तीनों वन्य जीव तस्करों के पास से संरक्षित प्रजाति का सांप बरामद हुआ है. इस पर तीनों वाइल्ड लाइफ स्मगलर्स को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 में गिरफ्तार किया गया. साथ ही आरोपियों के खिलाफ कोतवाली विकासनगर में मुकदमा पंजीकृत किया गया।
-अजय सिंह, एसएसपी, देहरादून-
inaturalist.org वेबसाइट के अनुसार लाल रेत बोआ विषैले नहीं होते हैं. ये सांप भारत, पाकिस्तान और ईरान में पाए जाते हैं. इनके साथ कई अंधविश्वास जुड़े हुए हैं. सिर जैसी दिखने वाली इसकी गोल पूंछ के कारण कुछ लोग इसे “दो मुंह वाला सांप” कहते हैं. इनका शरीर मोटा होता है और उस पर छोटे-छोटे कीलदार शल्क होते हैं जो चमकदार दिखते हैं. आमतौर पर ये सांप समान रूप से लाल भूरे रंग और कभी-कभी काला भी होता है. ये सांप औसतन 2-3 फीट तक बढ़ते हैं. ये शुष्क, रेतीले क्षेत्रों और ढीली मिट्टी वाले चट्टानी इलाकों में निवास करते हैं. ये सांप कृंतक, गेको और अन्य सांपों को खाता है।



